उलूक टाइम्स: राष्ट्रपिता
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शुक्रवार, 30 जनवरी 2026

पिता होना बात तो है पर राष्ट्रपिता होना ? कभी न चाहते हुए भी कुछ लिखना जरूरी हो जाता है

हम हैं
कितना हैं
हमको आभास है
अपने उतना होने का
हम बिल्कुल भी नहीं थे
जब तुम थे पूरे से भी जियादा
तुम नहीं थे तब हम हैं
कितना हैं पता नहीं है
हमारे होने और हमारे न होने में
बहुत बड़ा फासला नहीं है
आज हैं कल नहीं भी होंगे
कितना नहीं होंगे
समय फैसला करेगा
तुम कल भी थे आज भी हो
और तुम रहोगे भी
तुम्हारा होना भी उतना ही जरूरी है
तुम थे तब हालात बहुत खराब थे
तुम नहीं थे हालात और भी खराब हो गए
संतुलन की धुरी में
तुमने तब भी बनाए रखा विश्वास
आज भी है तुम्हारे नहीं होने के बाद भी
हमने तुम्हें नहीं देखा हमने तुम्हारे बारे में सुना
कितने भाग्यशाली होंगे वो लोग जो तुम्हारे साथ थे
कितने अभागे हैं हम
तुम नहीं हो हमारे साथ हमारे ही कारण
एक पीढ़ी से लेकर दूसरी पीढ़ी
क्या अनंत तक अंत नहीं है तुम्हारा
आज के दिन तुम्हें याद करना
सबसे जरूरी है
क्योंकि
आज भी वैसे ही दिन हैं
जैसे तब थे जब तुम थे
‘उलूक’ नतमस्तक है तेरे सामने
जब तू नहीं है
राष्ट्रपिता बापू
आज ही नहीं हर दिन तेरा दिन है
नमन |

चित्र साभार: https://www.shutterstock.com/



रविवार, 1 अक्टूबर 2017

हैप्पी बर्थ डे टू यू बापू ‘उलूक’ दिन में मोमबत्तियाँ जलाता है

‘दुकान’ एक ‘दीवार’
जहाँ ‘दुकानदार’
सामान लटकाता है

दुकानों का बाजार
बाजार की दुकाने
जहाँ कुछ भी नहीं
खरीदा जाता है

हर दुकानदार
कुछ ना कुछ बेचना
जरूर चाहता है

कोई अपनी दुकान
सजा कर बैठ जाता है
बैठा ही रह जाता है

कोई अपनी दुकान
खुली छोड़ कर
किसी दूसरे की
दुकान के गिरते
शटर को पकड़ कर
दुकान को बन्द होने से
रोकने चले जाता है

किसी की
उड़ाई हवा को
एक दुकान एक
दुकानदार से लेकर
हजार दुकानदारों
द्वारा हजार दुकानों
में उड़ा कर
फिर जोर लगा कर
फूँका भी जाता है

‘बापू’
इतना सब कुछ
होने के बाद भी
अभी भी तेरा चेहरा
रुपिये में नजर आता है

चश्मा
साफ सफाई
का सन्देश
इधर से उधर
करने में काम में
लगाया जाता है

मूर्तियाँ पुरानी
बची हुई हैं तेरी
अभी तक
कहीं खड़ी की गयी
कहीं बैठाई गयी हुई
एक दिन साल में
उनको धोया पोछा
भी जाता है

छुट्टी अभी भी
दी जाती है स्कूलों में
झंडा रोहण तो
वैसे भी अब रोज
ही कराया जाता है

चश्मा धोती
लाठी चप्पल
सोच में आ जाये
किसी दिन कभी
इस छोटे से जीवन में
जिसे पता है ये मोक्ष
'वैष्ण्व जन तो तैने कहिये'
गाता है गुनगुनाता है

जन्मदिन पर
नमन ‘बापू’
‘महात्मा’ ‘राष्ट्रपिता’
खुशकिस्मत ‘उलूक’
का जन्म दिन भी
तेरे जन्मदिन के दिन
साथ में आ जाता है
'दो अक्टूबर'
विशेष हो जाता है ।

चित्र साभार: india.com