किसलिये हुआ जाये
एक अखबार
एक अखबार
क्यों सुनाई जायें खबरें रोज वही
जमी जमाई दो चार
क्यों बताई जायें शहर की बातें
शहर वालों को हर बार
क्यों ना कुछ दिन शहर से
हो लिया जाये फरार
वो भी यही करता है करता आ रहा है
यहाँ जब कुछ कहीं नहीं कर पा रहा है
कभी इस शहर
तो कभी उस शहर चला जा रहा है
घर की खबर
घर वाले सुन और सुना रहे हैं
घर वाले सुन और सुना रहे हैं
वो अपनी खबरों को
इधर उधर फैला रहा है
इधर उधर फैला रहा है
सीखना चाहिये
इस सब में भी बहुत कुछ है
सीखने के लिये ‘उलूक’
इस सब में भी बहुत कुछ है
सीखने के लिये ‘उलूक’
बस एक तुझी से
कुछ नहीं हो पा रहा है
कुछ नहीं हो पा रहा है
यहाँ बहुत हो गया है अब
तेरी खबरों का ढेर
तेरी खबरों का ढेर
कभी तू भी उसकी तरह
अपनी खबरों को लेकर
अपनी खबरों को लेकर
कुछ दिन
देशाटन करने को
क्यों नहीं चला जा रहा है ।
देशाटन करने को
क्यों नहीं चला जा रहा है ।
चित्र साभार: www.fotosearch.com
