उलूक टाइम्स

बुधवार, 23 नवंबर 2011

रिटायरमेंट

साठ से
हो गयी
पैंसठ
की हवा
फिर से
अचानक
क्या उड़ी
सुनते ही
शर्मा जी
की लाठी
पीछे गली
में जा पड़ी
नाई की
दुकान में
हो गया
बबाल
मेंहदी के
दाम में
देखा गया
अचानक
उछाल
पचास से
जो लोग
छुट्टियों में
थे जाने लगे
आज मेडिकल
सी एल पी एल
सभी को वापिस
मंगवाने लगे
और तो और
कई उम्रदराज
दस से चार
दिखाई दिये
साढ़े चार पर
चपरासी की
विदाई किये
उपर वाले
देख ले
साठ के उपर
पांच पर
जब आ रहा है
इतना ज्वार
पैंसठ छोड़ ना
पूरे सौ बना
फिर देखना
बूढ़े बूढ़े तेरे
से कितना
करने
लगते हैं
प्यार।

सोमवार, 21 नवंबर 2011

राजा लोग

कुछ साल
पहले ही
की बात है

हर शाखा
का
होता था
एक राजा

प्रजा भी
होती थी
चैन से
सोती थी

खुशहाली
ना सही
बिकवाली
तो नहीं
होती थी

राजा
आज भी
हुवा करता है

पर प्रजा
अब
पता नही
कहाँ है

अब तो
हर शख्स
राजा बना
बैठा है

कोई
राजा भी
कभी
राजा की
सुनता है

इसलिये
हर एक
अपना
किला
बुनता है

हर तरफ
किलों कि
भरमार है

लेकिन
सिपाही
फिर भी
ना
जाने क्यों
रहे हार हैं ?

सब ठीक है

सब कुछ
आराम से
चलता रहे
इस देश में
अगर
कुछ लोग
फालतू में
अन्ना ना
बनकर
दूसरौं के
गन्नो को
लहलहाने दें
सब कुछ
ठीक चलता
रहता है
सिर्फ
थोड़ी देर
असमंजस
होती है उसे
जिसे
फटे में टांग
अड़ाने की
आदत है
सब कुछ
होता है
सब स्वीकार
करते हैं
बस कुछ
बिल्लियां
खिसियाती हैं
और पंजो
के निशान
आप देख
सकते हैं
ब्लाग के
पन्नो पर ।