चिट्ठा अनुसरणकर्ता

सोमवार, 12 अगस्त 2019

तेरे जैसे कई हैं ‘उलूक’ बिना धागे के बनियान लिखते हैं


तारे
कुछ 
रोशनी के 
सामान 
लिखते हैं 

चाँद 
लिखते हैं 
आसमान 
लिखते हैं 

मिट्टी
पत्थर 
कुछ 
बेजुबान 
जमीन के 

सोच 
बैठते हैं 
वही
एक हैं 

जो 
जुबान 
लिखते हैं 

सिलवटें 
लिखते हैं 

सरेआम 
लिखते हैं 

कुछ 
लकीरें 
सोच कर 

तीर
कमान 
लिखते हैं 

कितना 
लिखते हैं
कुछ 

कई 
पन्नों में
बस 

हौले से 
मुस्कुराता
हुआ 
उनवान
लिखते हैं 

कुछ 
घर का 
लिखते हैं 

कुछ 
शहर का 
लिखते हैं 

थोड़े 
से
कुछ 

बस
मकान 
लिखते हैं 

अन्दर 
तक 

घुस के 
चीर 
देता है 

किसी 
का लिखना 

थोड़े से 
कुछ
बेशरम 

नुवान
लिखते हैं 

दाद देना 
बस में 
नहीं है 

दिखाते 
जरूर
हैं 

हिंदुस्तान 
लिखते हैं 

क्यों 
नहीं
लिखता 
कुछ नया 

लिखने जैसा 

तेरे जैसे 
कई हैं 
 ‘उलूक’ 

बिना 
धागे के 

बनियान 
लिखते हैं ।

 चित्र साभार: https://www.shutterstock.com

9 टिप्‍पणियां:

  1. विडीओ ब्लॉग पंच में आपके इस ब्लॉगपोस्ट की विडीओ चर्चा ब्लॉग पंच के नेक्स्ट एपिसोड में याने ब्लॉग पंच 4 में की जाएगी और उसमें से बेस्ट ब्लॉग चुना जाएगा पाठको द्वारा वहाँ पर दी गई कमेंट के आधार पर ।

    ब्लॉग पंच का उद्देश्य मात्र यही है कि आपके ब्लॉग पर अधिक पाठक आये और अच्छे पाठको को अच्छी पोस्ट पढ़ने मीले ।

    एक बार पधारकर आपकी अमूल्य कमेंट जरूर दे

    विडीओ ब्लॉग मंच का पार्ट ब्लॉग पंच 1 यहाँ पर है

    विडीओ ब्लॉग मंच का पार्ट ब्लॉग पंच पार्ट 2 यहाँ है

    विडीओ ब्लॉग मंच का पार्ट ब्लॉग पंच पार्ट 3 यहाँ है

    ब्लॉग पंच क्या है वो आप यहाँ पढ़े ब्लॉग पंच

    आपका अपना
    Enoxo multimedia

    उत्तर देंहटाएं
  2. बिना धागे का बनियान गज़ब बुने है सर।

    उत्तर देंहटाएं
  3. तारे
    कुछ
    रोशनी के
    सामान
    लिखते हैं
    व्वाहहहह..
    सादर नमन..

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (14-08-2019) को "पढ़े-लिखे मजबूर" (चर्चा अंक- 3427) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं
  5. सिलवटें लिखते हैं सरेआम लिखते हैं
    कुछ लकीरें सोच कर तीर कमान लिखते हैं !!!
    बहुत खूब आदरणीय सुशील जी !आज तो सरेआम ताने गए तीर कमान में गज़ब की लयात्मकता है। शानदार सृजन 👌👌👌👌👌👌सादर 🙏

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह सुन्दर प्रस्तुति सादर नमस्कार

    उत्तर देंहटाएं
  7. सोच
    बैठते हैं
    वही
    एक हैं
    जो
    जुबान
    लिखते हैं
    वाह!!!
    बहुत लाजवाब...

    उत्तर देंहटाएं
  8. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में मंगलवार 13 अगस्त 2019 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!



    सूचना में देरी के लिये क्षमा करें।

    सधन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...