आभार पाठक
'उलूक टाइम्स' पर जुलाई 2016 के अब तक के अधिकतम
217629 हिट्स को
अगस्त 2019 के 220621 हिट्स ने पीछे छोड़ा
पुन: आभार
पाठक
सुना गया है
अब हर कोई एक खुली हुयी किताब है
अब हर कोई एक खुली हुयी किताब है
हर पन्ना जिसका
झक्क है सफेद है और साफ है
सभी लिखते हैं
आज कुछ ना कुछ
बहुत बड़ी बात है
कलम और कागज ही नहीं रहे बस
बाकी सब इफरात है
कोई नहीं लिखता है कहीं
किसी भी अन्दर की बात को
ढूँढने निकलता है
एक सूरज को मगर
वो भी किसी रात को
सोचता है साथ में
सब दिन दोपहर में
कभी आ कर उसे पढ़ें
कुछ वाह करें
कुछ लाजवाब
कुछ टिप्पणी
कुछ स्वर्णिम गढ़ें
समझ में
सब के सब कुछ
बहुत अच्छी तरह से आता है
जितने से
जिसका काम चलता है
उतना समझ गया होता है
उसे
ढोल नगाड़े साथ ला कर
खुल कर
जरूर बताता है
जहाँ फंसती है जान
होता है
बहुत बड़ी जनसंख्या से जुड़ा
कोई उनवान
शरमाना दिखा कर
अपने ही किसी डर के खोल में
घुस जाता है
किस अखबार को
कौन कितना पढ़ता है
सारे आँकड़े
सामने आ जाते हैं
किस अखबार में
कैसे अपनी खबर कोई
हर हफ्ते छपवा ले जाता है
कैसे हो रहा है होता है
ऐसा कोई
पूछने ही नहीं जाता है
कोई
नजर नहीं आता है का मतलब
नहीं होता है
कि
समझ में नहीं आता है
उलूक के लिये
बस
एक राय
बस
एक राय
लिखना लिखाना छपना छपाना कहीं भीड़ कहीं खालिस सा वीराना
‘उलूक’ ठीक नहीं थोड़ा सा समझने के लिये इतने सारे साल लगाना
चित्र साभार: https://www.123rf.com/

वाह बहुत खूब आदरणीय सर
जवाब देंहटाएंसादर नमन
सादर प्रणाम सर.
जवाब देंहटाएंसच कहा है मुद्दे की बात समझने के लिये जानबूझकर लंबा वक़्त क्यों लगाना. सीधे-सीधे मुद्दे पर आ जाने से समय की अनावश्यक बर्बादी रूकती है.
अख़बारों से सामाजिक सरोकार ग़ाएब होने की एकमात्र वजह उनकी पूँजीवादी सोच है अतः वे जनता की गाढ़ी कमाई को सरकार के साथ खड़े दिखकर बेशर्मी से लूट रहे हैं.
एक राष्ट्रीय अख़बार का पूरे पेज़ की विज्ञापन दर क़रीब 8 लाख रुपए है. अब इस अख़बार में क़रीब 20 पेज़ होते हैं इन 20 में से कम से कम 5 पेज़(पूरा पेज़ ) पर आप सरकारी विज्ञापन देख सकते हैं. अब कमाई में चालाकी का तरीक़ा होता है कि अख़बार देश के अलग-अलग शहरों से लगभग 40 एडिशन प्रकाशित करता है और अगर इसकी कुल प्रतियाँ लगभग 5 लाख हैं तो विज्ञापन दर 8 लाख प्रति पेज़ से पाँच पेज़ की रकम हुई 40 लाख रुपए और अब इसे 40 शहरों से एक साथ छपना है तो अख़बार की विज्ञापनों से एक दिन की कुल कमाई होगी 40 लाखx 40 शहर =16 करोड़ रुपए
आंकड़ा भारी-भरकम है तो आप इसे अपनी सुविधानुसार संक्षिप कर लीजिए. 16 को एक मान लीजिए तो भी 1 करोड़ की प्रतिदिन की कमाई. . ! अर्थात आपको समझ लेना चाहिए की सरकार की ग़लत नीतियों की आलोचना की बजाय जय-जयकार क्यों हो रही है?
वैज्ञानिकों ने संसार का सर्वाधिक बुद्धिमान प्राणी उलूक / Owl को घोषित किया है.
आजकल जनभाषा में उलूक की बोली मनभावन हो गयी है. अच्छा है यह स्वर बुलंद रहे क्योंकि आगे की पीढ़ियाँ हमसे सवाल करेंगी कविवर रामधारी सिंह दिनकर की इन पंक्तियों के साथ-
समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध,
जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनके भी अपराध.
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (02-09-2019) को "अपना पुण्य-प्रदेश" (चर्चा अंक- 3446) पर भी होगी।
जवाब देंहटाएं--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज रविवार 01 सितंबर 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंढूँढने निकलता है
जवाब देंहटाएंएक सूरज को मगर
वो भी किसी रात को
अद्भुत सोच गहन, सारगर्भित।
कोई नहीं लिखता है कहीं
जवाब देंहटाएंकिसी भी अन्दर की बात को
ढूँढने निकलता है
एक सूरज को मगर
वो भी किसी रात को.. वाह !लाज़बाब सर
प्रणाम
सादर