उलूक टाइम्स: मत खोज लिखे से लिखने वाले का पता

चिट्ठा अनुसरणकर्ता

गुरुवार, 5 दिसंबर 2019

मत खोज लिखे से लिखने वाले का पता


कोई
नहीं लिखता है

अपना पता
अपने लिखे पर

शब्द
बहुत होते हैं
सबके पास

अलग बात है

शब्दों
की गिनती
नदी नालों में
नहीं होती है

लिखना
कोई
युद्ध नहीं होता है

ना ही
कोई
योजना परियोजना

लिखना
लिखाना
पढ़ना पढा‌ना

लिखा
लाकर
समेटा
एक बड़े से
परदे पर
ला ला कर
सजाना

लिखना
प्रतियोगिता
भी नहीं होता है

लिखे पर
मान सम्मान
ईनाम
की
बात करने से
लिखने
का
आत्म सम्मान
ऊँचा
नहीं होता है

लिखा
लिखने वाले के
आस पास
हो रहे कुछ का
आईना
कतई
नहीं होता है

जो
लिखा होता है

उससे
होने ना होने
का
कोई सम्बंध
दूर दूर तक
नहीं होता है

सब
लिखते हैं
लिखना
सबको आता है

सबका
लिखा
सब कुछ
साफ साफ
लिखे लिखाये
की खुश्बू
दूर दूर तक
बता कर
फैलाता है

बात अलग है
अचानक
बीच में
मोमबत्तियाँ
लिखे लिखाये पर
हावी होना
शुरु हो जाती हैं

आग लिखना
कोई नयी बात
नहीं होती है

हर कोई
कुछ ना कुछ

किसी ना किसी
तरह से
जला कर

उसकी
रोशनी में
अपना चेहरा
दिखाना चाहता है

‘उलूक’
बेशरम है
उसको पता है
 आईने में
सही चेहरा
कभी
 नजर
नहीं आता है

इसलिये
वो खुद
 अपनी
बकवास लेकर

अपनी
पहचान
के साथ
मैदान पर
उतर आता है | 

चित्र साभार: http://clipart-library.com/



7 टिप्‍पणियां:

  1. बेहतरीन आईना दिखाया आपने सर।
    आईना दीखना दिखाना जरुरी होता है वक़्त की गहराती झुर्रियाँ गिनने के लिए ही सही।

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  2. आग लिखना सबको आता है
    आक्रोश सब में है
    बुद्धि का रूप है
    जो किसी से कुछ
    किसी से कुछ लिखवाती है।
    शानदार लेखन बकवास कैसे हो सकता है?

    पधारें 👉👉 मेरा शुरुआती इतिहास

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  3. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शुक्रवार 06 दिसम्बर 2019 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  4. जी नमस्ते,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार(०६-१२-२०१९ ) को "पुलिस एनकाउंटर ?"(चर्चा अंक-३५४२) पर भी होगी।
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।

    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ….
    अनीता सैनी

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  5. उलूक ने अगर अपना 'सांच कहो' वाला कबीरी ढंग नहीं बदला तो वह एक दिन एनकाउंटर की भेंट चढ़ जाएगाॉ.़ ़

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  6. बहुत ही गहरा चिंतन सर।
    लिखे पर
    मान सम्मान
    ईनाम
    की
    बात करने से
    लिखने
    का
    आत्म सम्मान
    ऊँचा
    नहीं होता है
    .
    क्या ख़ूब लिखा है सर आपने, वाह।

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  7. उलूक की अंतर्दृष्टि के क्या कहने - अँधेरे मेे भी दिखाई दे जाता है.
    ेें

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