उलूक टाइम्स: एक चोर का डैमेज कंट्रोल वाह वाही चाहता है अखबार उसकी एक पुरानी खबर के बाद बस चुप हो जाता है

सोमवार, 18 जनवरी 2021

एक चोर का डैमेज कंट्रोल वाह वाही चाहता है अखबार उसकी एक पुरानी खबर के बाद बस चुप हो जाता है

 


बहुत
हो गया है

कूड़ा
हो ही जाता है
कूड़े का डिब्बा
गले गले तक भर जाता है

होना
कुछ नहीं होता है
पता होता है

फुसफुसाने में
सब खो जाता है

बड़ी खबर
किसने कह दिया
आपके सोचने से होगी

आदमी
देख कर
खबर का खाँचा
बनाया जाता है

प्रश्न
प्रश्न होता है
क्या होता है
अगर किसी को
बता दिया जाता है

किसने बताया
किसको बताया
किसलिये पूछना चाहता है

जहाँ
कुछ नहीं होना होता है

वहाँ
एक कबूतर
हवा में उड़ा दिया जाता है

सजा
जरूरी होती है
मिलती भी है उसे

जिसको
पूछने की आदत के लिये
तमगा कभी दिया जाता है

शरीफ और नंगे
का अंतर
बहुत बारीक है

जमाना
किसे आगे देखना चाहता है

अभी अभी
देख कर उड़ा है
‘उलूक’
कुछ मुँह छुपा कर अपना

जो हुआ है
सब को पता है
जीत किसकी हुई
चोर चोर मौसेरे
घूँम रहे हैं खुले आम

एक शरीफ
अपना मुँह चुल्लू में डुबाना चाहता है ।

चित्र साभार: http://www.onlineaudiostories.com/

30 टिप्‍पणियां:

  1. अभी अभी
    देख कर उड़ा है ‘उलूक’
    कुछ मुँह छुपा कर अपना

    जो हुआ है
    सब को पता है
    जीत किसकी हुई
    चोर चोर मौसेरे
    घूँम रहे हैँ खुले आम

    एक शरीफ अपना मुँह
    चुल्लू मेँ
    डुबाना चाहता है ।..सत्य का खाका खींचती नायाब रचना..

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (20-01-2021) को "हो गया क्यों देश ऐसा"  (चर्चा अंक-3952)   पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    -- हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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  3. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन  में" आज मंगलवार 19 जनवरी 2021 को साझा की गई है.........  "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  4. कूड़ा दिखता भी है लेकिन उन्हें जो कुछ नहीं कर सकते, करने-धरने वाले एक ही थैली के चट्टे-बट्टे जो होते हैं अब उन्हें कौन बोले

    बहुत सही

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  5. जो हुआ है
    सब को पता है
    जीत किसकी हुई
    चोर चोर मौसेरे
    घूँम रहे हैँ खुले आम
    बेहतरीन रचना आदरणीय।

    जवाब देंहटाएं
  6. शरीफ और नंगे
    का अंतर
    बहुत बारीक है

    जमाना
    किसे आगे देखना चाहता है - - गहरे निशान छोड़ती रचना कम शब्दों में बहुत कुछ कह जाती है, हमेशा की तरह अद्वितीय - - नमन सह।

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  7. जो हुआ है
    सब को पता है
    जीत किसकी हुई
    चोर चोर मौसेरे
    घूँम रहे हैं खुले आम...

    सटीक पंक्तियां...यही तो हो रहा आजकल.🌹🙏🌹

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  8. कुछ तो बात है
    पर क्या किसी को मालुम नहीं होता है
    खबरें भी ऐसे ही बनती हैं
    ऐसे ही सब होता है

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  9. वाह!गज़ब का सृजन सर।

    एक शरीफ
    अपना मुँह चुल्लू में डुबाना चाहता है।...वाह!

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  10. सजा
    जरूरी होती है
    मिलती भी है उसे

    जिसको
    पूछने की आदत के लिये
    तमगा कभी दिया जाता है
    बहुत बहुत सुन्दर

    जवाब देंहटाएं
  11. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार २२ जनवरी २०२१ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

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  12. आदमी
    देख कर
    खबर का खाँचा
    बनाया जाता है


    एकदम सटीक..... सुन्दर अभिव्यक्ति....

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  13. कितने आयामों को समेत कर लिख दिया ... गहरा ...

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  14. किसने बताया
    किसको बताया
    किसलिये पूछना चाहता है
    जहाँ
    कुछ नहीं होना होता है

    वहाँ
    एक कबूतर
    हवा में उड़ा दिया जाता है

    वाह!!!

    एक शरीफ
    अपना मुँह चुल्लू में डुबाना चाहता है।
    और करे भी क्या बेचारा.... जब चोर चोर मौसेरे भाई.....
    लाजवाब सृजन।

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  15. शरीफ और नंगे
    का अंतर
    बहुत बारीक है
    -------------
    सही सर जी। बहुत सुंदर।

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  16. अति उत्तम !! आप ने अपनी रचना से बहुत मुद्दों को छु दिया सुशील जी !!

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  17. बेहद शानदार
    सहजता से गहरी बात कह देतें हैं आप

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