लिख ले कुछ अब अपने भी करतब
सोच नहीं सलाहकारों का क्या होगा
छिप लेंगे कुछ खबरों के पीछे
उस्तादों के व्यापारों का क्या होगा
तूती बोल रही जब करतूतों की
कालजयी सरोकारों का क्या होगा
परदे के पीछे खेल रहे खुद धागे
कठपुतली के व्यभिचारों का क्या होगा
किसने लिखनी है कलियुग में रामायण
धनुष यज्ञ के किरदारों का क्या होगा
छोटे छोटे कतरे लेखक के गोलक के
फूटी किस्मत के दरबारों का क्या होगा
हर रस का व्यापार रसीले सब व्यापारी
‘उलूक’ करता चल बकवास बिना सोचे
चिट्ठों और चिट्ठाकारों का क्या होगा
चित्र साभार: https://www.shutterstock.com/

आपका आप ही को
जवाब देंहटाएं‘उलूक’ करता चल बकवास बिना सोचे
चिट्ठों और चिट्ठाकारों का क्या होगा
सादर वंदन
अरे सर सिम्पल बात ... होइहें वही जो राम रचि राखा :)
जवाब देंहटाएंसादर प्रणाम सर।
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार २९ जुलाई २०२५ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
लिख ले कुछ अब अपने भी करतब
जवाब देंहटाएंसोच नहीं सलाहकारों का क्या होगा
छिप लेंगे कुछ खबरों के पीछे
उस्तादों के व्यापारों का क्या होगा
तूती बोल रही जब करतूतों की
कालजयी सरोकारों का क्या होगा
बहुत सुन्दर पंक्तियाँ 🙏 प्रणाम गुरुजी
राजनीति की उठापटक के बीच आपकी क़लम गहरे कटाक्ष कर जाती है।
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंवाह!!!
जवाब देंहटाएंक्या बात...
बहुत ही लाजवाब ।
भाईसाब आपके शब्दों में जो तंज है ना, वो किसी तलवार से कम नहीं। आपने हर पंक्ति में जैसे सिस्टम की गांठ खोल दी हो। कलियुग में रामायण की बात करना ही बगावत लगती है आजकल। आपने सवाल नहीं उठाए, आपने तो सच का आईना रख दिया सबके सामने।
जवाब देंहटाएंकुछ हुआ क्या
जवाब देंहटाएंचिट्ठों और चिट्ठाकारों का