भारत एक खोज
एक बेवकूफ था
पता नहीं क्या खोज पाया
क्या खोया क्या पाया
चन्द्रयान से भेजा गया एक पार्सल
जरूर वही होगा
उसी ने होगा गिराया
परिपक्व हो चुके हैं हम
समझते हैं समझ होनी जरूरी है
आस पास बहुत कुछ होता है
बताना किसलिये जरूरी है
मदारी ने ध्यान भटकाया है
उसी भारत एक खोज वाले के
भूत ने प्रज्ञान को लुढ़काया है
रोना छाती पीटना
गले लगाना पीठ थपथपाना
भी स्वाभाविक था समझ में आया है
चन्द्रयान मंगलयान फिर कभी उड़ लेगा
मदारी को मौका फिर फिर मिलेगा
जमूरे गजब हैं
पता नहीं है उनके चरण किधर हैंं
तीव्र इच्छा है चूमने हैं छूने हैं
ऐसा समय भारत का आयेगा
सपने में कभी भी नहीं आया है
‘उलूक’ किसी मंदिर में जा
पण्डित से जॉप करवा
कुल्हाड़ी पर पैर मारने का आदेश किसने दिया है
और क्यों कर के आया है
‘ब्लॉग सेतू’ रैंक ने
नाराज हो कर फिर से
ऊपर की ओर हो मुँह चिढ़ाया है ?
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