उलूक टाइम्स: महापुरुष
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बुधवार, 19 सितंबर 2012

महापुरुष

बहुत कुछ कहें
या सब कुछ
कोई फर्क
नहीं होता है
एक महापुरुष
के पास जितना
अपना होता है
कहीं भी नहीं
उतना होता है
लिखना शुरु हो जाये
भरते चले जाते हैं
गागर सागरों से
जाते जाते अगर
लिख भी जाता है
जीवनवृतांत
कुछ नदियाँ नीर भरी
नीली नीली सी
फैल जाती हैं
गागर फिर भी
छलकता हुआ ही
नजर आता है
बचा हुआ भी इतना
ज्यादा होता है
एक दूसरा शख्स
उसपर उसकी
आत्मकथा लिख
ले जाता है
पन्ने दर पन्ने
किताब से किताब
होता हुआ वो कहीं
से शुरु होता हुआ
कहीं भी खत्म
नहीं हो पाता है
आज हर शख्स
अपने में एक
महापुरुष पाता है
एक पन्ना लिखना
भी चाहे तो भी
पूरा नहीं कर पाता है
महापुरुषों की
श्रेणी में फिर भी
आने का जुगाड़
लगाने का कोई
भी मौका नहीं
गवाना चाहता है ।

सोमवार, 10 सितंबर 2012

एक संत आत्मा का जाना

जगन भाई
के इंतकाल
की खबर
जब
मगन जी
को गई सुनाई

सुनते ही
अगले की
आँखें
भर आई

बोले
अरे
बहुत संत
महापुरूष थे

ना कुछ खाते थे
ना कभी पीते थे

किसी से भी कभी

पंगा नहीं लेते थे

बीड़ी
सिगरेट शराब
तम्बाकू गाँजा प्रयोग करने
वाले अगर
उनकी
संगत में
कभी आ जाते थे

हफ्ता दस
दिन में ही
सब कुछ
त्याग कर
सामाजिक
हो जाते थे

अब आप
ही 
बताइये
ऎसे लोगों
का दुनिया
में लम्बे
समय
तक रहना
ऊपर वाले
से भी क्यों 

नहीं देखा
जाता है

इतनी कम
उम्र में
वो इनको
सीधा
 ऊपर
ही उठा
ले जाता है

तब हमने
मगन जी
को ढाँढस
बंधाया

प्यार से
कंधे में
हाथ
रख कर
उनको
समझाया

देखिये
ये सब
चीजें भी
ऊपर
वाला ही
तो यहाँ
ला ला
कर
फैलाता है

अगर
कोई इन
सब चीजों
का प्रयोग
नहीं कर
पाता है

खुद भी
नहीं खाता है
खाने वाले
को भी
रोकने
चला जाता है

अब हर
दूसरा आदमी
ऎसा ही
करने लग
जायेगा तो

ऊपर
वाले की
भी तो सोचो जरा
उसका तो
दो नम्बर
का धंधा
मंदा
हो जायेगा

इसलिये
ऎसे में
ऊपर वाला
आपे से
बाहर हो
जाता है

शरीफ
लोगों को
जल्दी ऊपर
उठा ले
जाता है
और
जो
करते
रहते है
प्रयोग
उल्टी सीधी
वस्तुओं का
दैनिक जीवन में
उनको एक
दीर्घ जीवन
प्रदान करके
अपने धंदे को
ऊपर बैठ
कर ही
रफ्तार देता
चला जाता है

यहाँ वाला
बस कानून
बनाता ही
रह जाता है ।