धुरी से खिसकना
एक घूमते हुऐ लट्टू का
एक घूमते हुऐ लट्टू का
नजर आता है बहुत साफ
उसके लड़खड़ाना शुरु करते ही
घूमते घूमते
एक पन्ने पर लिखी एक इबारत
लट्टू नहीं होती है
ना ही बता सकती है खिसकना
किसी का उसका अपनी धुरी से
किसी का उसका अपनी धुरी से
दिशा देने के लिये किसी को
दिशा हीन होना बहुत जरूरी होता है
बिना खोये खुद को कैसे ढूँढ लेना है
बहुत अच्छी तरह से तभी पता होता है
शब्द अपने आप में भटके हुऐ नहीं होते हैं
भटकते भटकते ही
इस बात को समझना होता है
भटक जाता है मुसाफिर सीधे रास्ते में
एक दिशा में ही चलते रहने वाला
सबसे अच्छा
भटकने के लिये
खुद को भटकाने वालों के
भटकाने के लिये छोड़ देना होता है
खुद को भटकाने वालों के
भटकाने के लिये छोड़ देना होता है
लिखा हुआ किसी का कहीं कोई
लट्टू नहीं होता है
घूमता हुआ भी लगता है तो भी
उसकी धुरी को
बिल्कुल भी नहीं देखना होता है
सीधे सीधे एक सीधी बात को
सीधे रास्ते से किसी को समझाने के दिन
लद गये है ‘उलूक’
लद गये है ‘उलूक’
भटकाने वाली
गहरी तेज बहाव की बातों की
लहरों को दिखाने वाले को ही
आज के जमाने को
दिशायें दिखाने के लिये कहना होता है ।
लहरों को दिखाने वाले को ही
आज के जमाने को
दिशायें दिखाने के लिये कहना होता है ।
चित्र साभार: forbarewalls.com
