उलूक टाइम्स

बुधवार, 21 दिसंबर 2011

आईना

आज एक लम्बे
अर्से के बाद
पता नहीं कैसे मैं
जा बैठा घर के
आईने के सामने
मेरे दिमाग की तरह
आईने ने कोई अक्स
नहीं दिखलाया
मैं थोड़ा घबराया
नजर को फिराया
सामने कैलेण्डर में
तो सब नजर
आ रहा था
तो ये आईना
मुझसे मुझको
क्यों छिपा रहा था
सोचा किसी को बुलाउं
आईना टेस्ट करवाउं
बस कुता भौंकता
हुवा आया थोडा़ ठहरा
फिर गुर्राया जब
उसने अपने को आईने
के अंदर भी पाया
मुझे लगा आईना
भी शायद समय
के सांथ बदल रहा होगा
इसी लिये कबाड़ का
प्रतिबिम्ब दिखाने से
बच रहा होगा
विज्ञान का हो भी
सकता है ऎसा
चमत्कार
जिन्दा चीजों का ही
बनाता हो आईना
इन दिनो प्रतिबिम्ब
और मरी हुवी चीजों
को देता हो चेतावनी
कि तुम अब नहीं हो
कुछ कर सकते हो
तो कर लो अविलम्ब।

मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

कुछ कहो

बस दो चार ही
लोग गांव के
अब कुछ
अपने जैसे
नजर आते हैं
सड़क और गली
की बात मगर
कुछ और ही
दिखाई देती है
सारे ही कुत्ते
सामने पा कर
जोर जोर से
अपनी पूंछे
हिलाते हैं
फिर भी समझ
नहीं पाते हैं
पागलखाने के
डाक्टर साहब
को अब भी
नार्मल ही
नजर आते हैं
हां लोग देख
कर थोड़ा सा
अब कतराते हैं
बहुमत साथ ना
होने का फायदा
हमेशा पार्टी के
लोग उठाते हैं
फुसफुसा कर ही
करते हैं बात भी
मोहल्ले वाले
फिर गया दिमाग
कहते तो नहीं हैं
बस सोच कर
सामने सामने से
ही मुस्कुराते हैं
कुछ तो समझाओ
'उलूक' जमाने को
पागल खाने के डाक्टर
ऐसे लोगों को ऐसे में भी
मुहँ 
क्यों नहीं लगाते हैं?

सोमवार, 19 दिसंबर 2011

होश

एक खामोश
कब जिंदगी
के आगोश
में मदहोश
हो जायेगा
ये होश में
रहने वाला
ही बता
पायेगा

बेहोश
लोगों 
के
शब्दकोश

में आक्रोश
नहीं होता
एक सरफरोश
कभी अहसान
फरामोश

नहीं होता
परहोश
भले ही

हो जायेगा
लेकिन
कभी भी

लच्छेदार
बातों 
में
नहीं आयेगा

बेहोश
करने 
वाले
होश में

योजनाऎं
बना

मदहोश
लोगों 
के
साथ फिर

एक बार
आ रहे हैं
परहोश
करने

लेकिन
इस 
बार
पाला

उल्टा पड़
जायेगा
बेहोश
जल्दी 
ही
इस बार

फिर से
होश 
में
आ जायेगा

ऎसा हसीन
सपना जब
किसी दिन
किसी 
को
आयेगा

उस दिन
वाकई

सवेरा हो
जायेगा

अंधेरे का
व्यापारी

कुछ भी नहीं
समझ पायेगा
और बेहोश
हो जायेगा।