उलूक टाइम्स

बुधवार, 11 जनवरी 2012

चुनाव और मास्टर की सोच

चुनाव का
बुखार
आज भी
बहुत तेजी
दिखा रहा था

मैं मास्टर
समर्थकों की
भीड़ से
बचता हुवा
जा रहा था

मास्टरी
दिमाग
फिर हमेशा
की तरह
कुलबुला
रहा था

सोच रहा था
इस खर्चीले
चुनाव की
जगह परीक्षा
अगर करा
दी जाये

नेता देश
के एक
राष्ट्र व्यापी
परीक्षा
से चुने जायें

कुछ शेषन
या अन्ना
जैसे कड़क
परीक्षा नियंत्रक
नियुक्त कर
दिये जायें

नकल करने
की बिल्कुल
भी इजाजत
ना दी जाये
और
आशावाद
चढ़ते ही
जाने लगा
आसमान

अचानक
फिर से
निराशा ने
दिया एक
झटका
और
कराया मुझे
ये भान
परीक्षा तंत्र
भी तो इसी
देश का
काम करायेगा

नकल जो
नहीं कर पाया
मास्टर को
घूस दे कर
के आयेगा

अन्ना की
ये कोशिश
कहीं फिर
एक बार
धोखा खायेगी

टोपी सफेद
जिन लोगों
ने भुनाई
इस बार
परी़क्षा होगी
तो भी उनकी
ही कौपी
नम्बर लायेगी

फिर से
सबसे कम
पढ़ने वाला
प्रथम आयेगा

अनपढ़ ही
इस देश को
लगता है
हमेशा चलायेगा।

मंगलवार, 10 जनवरी 2012

चुनाव

नामांकन दर नामांकन
चहल पहल नगर में
नजर हर जगह
आ रही थी
गुजरा जब आज बाजार से
दारू दिखी तो नहीं कहीं
पर खुश्बू चारों ओर से
बयार की तरह आ रही थी
रसायन शास्त्री की नाक
ईथायल एल्कोहल है
कहीं आसपास करके
उसे बार बार बता रही थी
ठंड बहुत थी
लाजमी है गरमी की
जरूरत भी हो जाती है
दारू अंदर जाती है
इतनी अहसान फरोश
भी नहीं होती है
गरमी तो पैदा
कर ही जाती है
कई दलों के समर्थक
दिखाई दे रहे थे
पता नहीं चल रहा था
किसके कितनी गटकाये हुवे थे
आचार संहिता में शराब
पीने पर पाबंदी
नहीं होती है शायद
इतना क्या कम नहीं है कि
चुनाव आयोग के लोग
नहीं लगाये हुवे थे
इस सारी खुश्बू का
हिसाब किस हिसाब
में जोड़ा जायेगा
ये तो चुनाव आयोग
ही बता पायेगा
ना जुड़े कोई बात नहीं
वोट तो पड़ ही जायेगा ।

सोमवार, 9 जनवरी 2012

इतवारी मुद्दा

दैनिक हिन्दुस्तान रविवार का पन्ना छ:
पढ़ कर हुवा मैं भावुक और गया बह ।

शिक्षक संघर्ष समिति खफा सुन राज्य सरकार
वादाखिलाफी का लगाया आरोप किया खबरदार।

खबर है "बेरोजगार और शिक्षक सरकार से खफा"
"बेरोजगार शिक्षक" होती तो ज्यादा आता मजा।

विपक्ष के हो गये मजे सरकार को नहीं देगें ये अब वोट
साठ से पैंसठ नहीं किये हैं ये अब खायेंगे देखो चोट।

इतना जरूर अच्छा हुवा है कोई नहीं बदला अपना दल
सरकार के दल वाला नहीं गया और कहीं पाला बदल।

इस बार सरकार के दल वाले शिक्षक हो गये थोड़ा विफल
सांठ गांठ है ही विपक्ष के शिक्षक शायद अब दें तकदीर बदल।

चिंता की कोई बात नहीं है सरकार जिसकी भी आयेगी
बहुत जोर है बूढे़ बाजुओं में पैंसठ जरुर करवायेगी।

बाकी खबर खबर है ये बेरोजगार कैसे फंसे खबर में
शायद सोचे होंगे रास्ता साफ हो जायेगा ये तो जायेंगे कबर में।

रविवार, 8 जनवरी 2012

ठंड और विचार

ठंड से
जम 
गये
विचार आज

मौन हो गये

आकाश
में बादल

सामने
पहाडियों

पर बर्फबारी

कम तापमान

रजाई के अंदर
दिन भर
उछल कूद


फिर भी
गरमी की

हो रही है आज
विचारों को जरुरत

बेचारे
विचार भी

जानते हैं
कुछ 
अचार
की तरह

सब लोग छांट
लेते हैं उन्हें
अपनी सुविधा
अनुसार हमेशा

ज्यादातर होता

आया है यहां
बना के पेश
कर दी जाये
व्यंग रूपी
अगर खीर

लोग उसका

भी रूपांतरण
कर फेंकते हैं
तीखा तीर

ठंड में

रहने दिये
जाये विचार
कुछ देर

अचार भी

बनता है पक्का

कुछ 
समय छोड़
दिया जाये
अगर यूं ही
मर्तबान में ।

शनिवार, 7 जनवरी 2012

जुल्म

दैनिक
हिन्दुस्तान 
भी

देखिये
कैसा
जुल्म
ढा रहा है


ना
पचने वाली

एक खबर
आज

सुना रहा है

गढ़वाल में

प्रोफेसर लोगों
की नेतागिरी
पर संकट
मंडरा रहा है

हाय हाय
मेरे 
तो
सीने में

जोर का दर्द
उठा जा रहा है

कुलपति जी

वहाँ के ऎसा
कैसे कर पा
रहे होंगे

या खाली में

हमारे लिये
एक खबर
बना रहे होंगे

भगवान करे

मेरे कुलपति
के कान में
ये खबर ना
जा पाये

वर्ना

कहीं

उनको भी
वैसा 
ही
बुखार
ना 
चढ़ जाये

प्रोफेसरी
से
क्या
हो पाता है


नेतागिरी
से ही 
तो देश
पढ़ 
पाता है

स्कूल
में पढ़ायेंगे

तो खाली बच्चे
पास हो जायेंगे

नेताओं को
पढ़ा 
लिये
अगर

तो 
सात पीढि़यों
का भला
कर
ले जायेंगे

नेताओं को
वैसे 
भी
पढ़ाने की

जरूरत है

स्कूल में

पढा़ भी दिया
तो कौन सा
कद्दू में तीर
मार जायेंगे।