चिट्ठा अनुसरणकर्ता

मंगलवार, 12 नवंबर 2019

स्याही से भरी दिख रही है हर कलम पर कुछ नहीं लिख रही है


स्याही से
भरी
दिख रही है

पर

कुछ नहीं
लिख रही है

उँगलियों
से
खेल रही है

मगर

कुछ
भारी होकर
कलम

आज

बस
रिस रही है

चलती
रही है
हमेशा

किसी के
इशारों से

आज भी
दिख रही है

ना जाने
क्यों
लग रहा है

कुछ
झिझक
रही है

कुछ
रुक रही है

कागज कागज
न्योछावर
होती रही है

अपनी
आज भी

कुछ नहीं
कह रही है

लाल
गलीचा
लिये
खुद बिछी है
हमेशा

अभी भी
उसी तरह

जमीन जमीन
बिछ रही है

मुद्दत
के बाद
जैसे

नींद से
उठ रही है

शिद्दत से
बेखौफ

अँधेरों
को
लिखने वाली

पता नहीं
किसलिये ‘उलूक’

उजाले उजाले

हर तरफ
बिक रही है

उदास नहीं है

मगर

खुश भी
नहीं
दिख रही है

स्याही
से
भरी
दिख रही है

पर

कुछ भी
नहीं
लिख रही है ।

चित्र साभार:
https://flowvella.com/

9 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज बुधवार 13 नवम्बर 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  2. कलम आजकल जो भी लिख रही है, वो देश की प्रगति की भांति, उड़ने वाली स्याही से लिख रही है या फिर पानी पर लिख रही है. इसलिए उसका लिखा पढने में नहीं आता.

    जवाब देंहटाएं
  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 14.11.2019 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3519 में दिया जाएगा । आपकी उपस्थिति मंच की गरिमा बढ़ाएगी ।

    धन्यवाद

    दिलबागसिंह विर्क

    जवाब देंहटाएं
  4. कलम स्वरचित अभिमानित सज्जनों के हाथ पड़ गयी है।
    बुरा सुने नहीं
    अच्छा लिखने न पाए।
    बहुत बढ़िया।


    कुछ पंक्तियां आपकी नज़र 👉👉 ख़ाका 

    जवाब देंहटाएं
  5. वाह्ह्ह्ह!!!!!!!
    "...
    स्याही
    से
    भरी
    दिख रही है

    पर

    कुछ भी
    नहीं
    लिख रही है ।
    ..."

    जवाब देंहटाएं
  6. स्याही से भरी कलम शायद रायता फैला रही है ...
    शायद लिख रही है पर दिख नहीं पा रहा ...

    जवाब देंहटाएं
  7. उदास नहीं है

    मगर

    खुश भी
    नहीं
    दिख रही है


    kavita ka roop bahut sundr lgaa...lekhan shaili puraa pdhne pr mazboor krne wali

    उदास नहीं है

    मगर

    खुश भी
    नहीं
    दिख रही है

    ye lines khaas tour pr psnd ayi\

    bdhaayi

    जवाब देंहटाएं

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