उलूक टाइम्स: स्वाभिमानी
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शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

चिट्ठाकार हैं कुछ स्वाभिमानी हैं कुछ थोड़ा सा बस पानी पानी हैं

 
थोड़ी सी हैं कुछ बातें हैं खुद की हैं जो
खुद को बस थोड़ी सी समझानी हैं
किसी और से क्या कहना है कुछ
जब समझ में उसको उसकी अपनी ही बातें नहीं आनी हैं

दिखता जो कुछ है उसपर कुछ लिखना है
कहानी तो बस कुछ और ही दिखे से इतर दो एक बनानी हैं
गांधी रखकर खोज  में अपनी बंदर तीन उठा गोद में अपनी
नाख  कान आंख अपनी ही खुद की ही तो बंद करवानी हैं

सच ही सोचेंगे सच ही खोदेंगे सच की ही लड़ाई
लड़ने को  ही बस कुछ लिखने में ही ठानी है
अपने अपने लिखे लिखाए में
अपनी बातें इसकी बातें उसकी बातें
बातें तो बस आनी जानी हैं

कुछ पढ़ते हैं इसका ही लिखा
कुछ को लिखा उसका बस पढ़ना है
कुछ को बस लिखना ही है पढ़ना ही बस बेमानी है

कुछ लिखते पढ़ते हैं कुछ पढ़ते हैं फिर लिखते हैं
सब की अपनी आदत हैं समझ में कुछ कुछ ही तो आनी हैं
चिट्ठाकारी से जन्मे हैं कुछ चिट्ठे हैं
चिट्ठाकार हैं कुछ
स्वाभिमानी हैं कुछ थोड़ा सा बस पानी पानी हैं
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                                                                 चित्र साभार: https://www.dreamstime.com/

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