थोड़ी सी हैं कुछ बातें हैं खुद
की हैं जो
खुद को बस थोड़ी सी समझानी हैं
किसी और से क्या कहना है कुछ
जब समझ में उसको उसकी अपनी ही बातें नहीं आनी हैं
दिखता जो कुछ है उसपर कुछ लिखना है
कहानी तो बस कुछ और ही दिखे से इतर दो एक बनानी हैं
गांधी रखकर खोज में अपनी बंदर तीन उठा गोद
में अपनी
नाख कान आंख अपनी ही खुद की ही तो बंद
करवानी हैं
सच ही सोचेंगे सच ही खोदेंगे सच की ही लड़ाई
लड़ने को ही बस कुछ लिखने में ही ठानी है
अपने अपने लिखे लिखाए में
अपनी बातें इसकी बातें उसकी बातें
बातें तो बस आनी जानी हैं
कुछ पढ़ते हैं इसका ही लिखा
कुछ को लिखा उसका बस पढ़ना है
कुछ को बस लिखना ही है पढ़ना ही बस बेमानी है
कुछ लिखते पढ़ते हैं कुछ पढ़ते हैं फिर लिखते हैं
सब की अपनी आदत हैं समझ में कुछ कुछ ही तो आनी हैं
चिट्ठाकारी से जन्मे हैं कुछ चिट्ठे हैं
चिट्ठाकार हैं कुछ
स्वाभिमानी हैं कुछ थोड़ा सा बस पानी पानी हैं |
स्वाभिमानी हैं कुछ थोड़ा सा बस पानी पानी हैं |
चित्र साभार: https://www.dreamstime.com/
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पेज व्यूस : 10:15 पी एम, 31/07/2026
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