उलूक टाइम्स

शनिवार, 3 दिसंबर 2011

समापन

अंधेरे
के घेरे हैं
चारों तरफ

उजालों
से नफरत
हो जायेगी

दिया
लेकर
चले आओगे

रोशनी
ही भटक
जायेगी

कितनी
बेशर्मी
से कह
गये वो

रोशन है
आशियां

रोशनी
भी आयेगी

बेवफाओं
को तमगे
बटे हैं

वफा
ही क्यों
ना शर्मायेगी

यकीं
होने लगा
है पूरा
मुझको

दुनियां
यूं ही
बहल
जायेगी ।

शुक्रवार, 2 दिसंबर 2011

विश्वविद्यालय स्थापना दिवस

टूटती हुवी
चीज कोई
दिखाई दे
तो स्थापना
उसकी करवाईये

स्थापना
करने से
सुना है
दोष निवारण
हो जाता है

की हुवी
गलतियों पर
पर्दा सा एक
गिर जाता है

पाप बोध होने से
वो बच जाता है
जिसने टूटते हुवे
उस चीज पर
दांव कभी
लगाया था

मेरा घर
अगर कभी
मेरे से
गलती से
टूट जायेगा

मैं स्थापना
अपने घर की
करवाउंगा

परेशान
ना होईये
साथ में दावत
भी खिलवाउंगा

मेरी संताने
मेरे को नहीं
कोस पायेंगी

टूटे घर के
अवशेष
के साथ

जब वे
स्थापना के
शिलान्यास के
पत्थर को भी
गड़ा पायेंगी।

गुरुवार, 1 दिसंबर 2011

पक्का हो गया चोर भी

लिखता गया
लिखते लिखते
शायद
लिखना आ जाये सोच कर

पढ़ता गया
पढ़ते पढ़ते
शायद
पढ़ना आ जाये मान कर

लिखने पढ़ने का
कुछ हुवा या नहीं खुदा जाने
मक्कारी में जरूर उस्ताद हो गया हूँ

निरक्षरों को
अब साक्षर बना रहा हूँ
खाली बिलों में
दस्तखत करना सिखा रहा हूँ

बुद्धिजीवी का प्रमाण पत्र
जब से मिला है
लाल बत्ती गाड़ी पर लगा रहा हूँ

पढ़ाई लिखाई के
और भी हैं फायदे
उठा रहा हूँ

अनपढ़
दो चार
विधान सभा में पहुंचाने की
जुगत
लगा रहा हूँ

आप भी
कुछ नसीहत लेते हुवे जाईये
खुद पढ़िये और औरों को भी पढ़ाईये

कम से कम
इतना काबिल तो बनाईये
पूरा ना भी समेंट सकें
बीस तीस हिस्सा ही गोल करवाईये

बहुत मौके होते हैं
अनपढ़ की समझ में नहीं आ पाते हैंं
पढ़े लिखे होते हैं आसानी से चूना लगाते हैं
साथ में
राज्य रत्न का मेडल
बोनस की तरह मुफ्त में पाते हैं।