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शुक्रवार, 27 जून 2014

बेकार की नौटंकी छोड़ कर कभी प्यार की बात भी कर

बात करना इतना
भी जरूरी नहीं
कभी काम की
बात भी कर
बहुत कर चुका
बेकार की बातें
कभी सरकार की
बात भी कर
जीना मरना
सोना उठना
खाना पीना
सबको पता है
इसकी उसकी
छोड़ कर कभी
अपनी और
अपने घर की
बात भी कर
कान पक गये
बक बक तेरी
सुनते सुनते
किसी एक दिन
चुप चाप रहने
की बात भी कर
सब जगह होता है
सब करते हैं
पुराने तरीकों को
छोड़ कुछ नये
तरीके से करने
वालों की
बात भी कर
खाली बैठे
बात ही बात में
कितने दिन
और निकालेगा
कुछ अच्छी बात
करने की भी सोच
कुछ नई बात करने
की बात भी
कभी ईजाद कर
‘उलूक’ तंग आ
चुका है शमशान
का अघोरी तक
लाशों की बात
छोड़ कर कभी
जिंदा लोगों
की बात भी कर ।

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