इतना भी जरूरी नहीं
कभी काम की बात भी कर
बहुत कर चुका है
बेकार की बातें
बेकार की बातें
कभी सरकार की बात भी कर
जीना मरना
सोना उठना खाना पीना
सबको पता है
सोना उठना खाना पीना
सबको पता है
इसकी उसकी छोड़ कर कभी
अपनी और अपने
घरबार की बात भी कर
घरबार की बात भी कर
कान पक गये
बक बक सुनते सुनते तेरी
बक बक सुनते सुनते तेरी
किसी एक दिन
चुप चाप रहने रहाने की बात भी कर
सब जगह होता है
सब करते हैं
सब करते हैं
पुराने तरीकों को छोड़
कुछ नये तरीके से
करने कराने वालों की बात भी कर
करने कराने वालों की बात भी कर
खाली बैठे
बात ही बात में
कितने दिन और निकालेगा
बात ही बात में
कितने दिन और निकालेगा
कुछ अच्छी बात करने की सोच
कुछ नई बातें करने की बात
ईजाद भी कर
ईजाद भी कर
तंग आ चुका है
श्मशान का अघोरी तक
श्मशान का अघोरी तक
लाशों की बात छोड़
कभी मुर्दों के जिंदा हो जाने की बात भी कर
‘उलूक’ बेकार की नौटंकी छोड़ अब
कभी प्यार की बात भी कर ।
चित्र साभार: https://www.disneyclips.com/
‘उलूक’ बेकार की नौटंकी छोड़ अब
कभी प्यार की बात भी कर ।
चित्र साभार: https://www.disneyclips.com/

achchi lagi / aapki post :)
जवाब देंहटाएंअच्छा लगी / आपकी टिप्पणी :)
हटाएंबहुत सुन्दर प्रस्तुति।
जवाब देंहटाएं--
आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (28-06-2014) को "ये कौन बोल रहा है ख़ुदा के लहजे में... " (चर्चा मंच 1658) पर भी होगी!
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
आभार शास्त्री जी ।
हटाएंबहुत सुन्दर प्रस्तुति।
जवाब देंहटाएंआभारी हूँ ।
हटाएंलाशों की बात
जवाब देंहटाएंछोड़ कर कभी
जिंदा लोगों
की बात भी कर ।
...वाह...दिल को छूती बहुत ख़ूबसूरत रचना...
आभार ।
हटाएंबहुत ही सुंदर प्रस्तुति व रचना बेहद खूबसूरत ! , सर दोनों ब्लॉग को स्थान देने हेतु धन्यवाद :)
जवाब देंहटाएंआभार आशीष ।
हटाएंएक बार जरा आप इस लिंक का भी अवलोकन कर लें .... कुछ आवशयक कारणों से ऐसा मुझे करना पड़ रहा है ... आशा है आप अन्यथा नहीं लेंगे .... http://www.chalte-chalte.com/2014/06/blog-post_25.html
जवाब देंहटाएंप्रिय केवल जी मैं इस सूत्र को पढ चुका था । बस टिप्पणी ही नहीं की थी । आपके इस सूत्र को मेरे मेल पर भेजने के कारण ही मैं दुबारा यहाँ आ रहा हूँ । ये सब बातें हमारे रोज के जीवन में बहुतायत में हो रही हैं । मेरी राय में इस तरह की बातें उठना ब्लाग जगत के लिये एक स्वस्थ परँपरा नहीं है। बाकी आप बहुत अच्छा काम कर रहे हैं । ब्लाग सेतू ऊचाईयों को छूऐ मेरी शुभकामनाऐं हैं । शास्त्री जी ब्लाग जगह के एक वरिष्ठ और सम्मानित ब्लागर हैं। किसी को भी ठेस लगे ये अच्छी बात नहीं है । अभी भी कुछ बिगड़ा नहीं है । आपस में बात कर के गलतफहमियों को दूर किया जा सकता है । आँखिरकार ये हमारा ब्लाग परिवार है और परिवार में मतभेद हो ही जाते हैं । बाकि आप समझदार हैं ।
हटाएंलाशों की बात
जवाब देंहटाएंछोड़ कर कभी
जिंदा लोगों
की बात भी कर ।ज़िंदगी के फरमान की बात -कर।
आपका आभारी हूँ वीरू भाई :)
हटाएंबहुत बढ़िया सर!
जवाब देंहटाएंसादर
आभार यश ।
हटाएंनयी पुरानी हलचल का प्रयास है कि इस सुंदर रचना को अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
जवाब देंहटाएंजिससे रचना का संदेश सभी तक पहुंचे... इसी लिये आप की ये खूबसूरत रचना दिनांक 30/06/2014 को नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है...हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
[चर्चाकार का नैतिक करतव्य है कि किसी की रचना लिंक करने से पूर्व वह उस रचना के रचनाकार को इस की सूचना अवश्य दे...]
सादर...
चर्चाकार कुलदीप ठाकुर
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इस के लिये ईमेल करें...
ekmanch+subscribe@googlegroups.com पर...जुड़ जाईये... एक मंच से...
आभारी हूँ कुलदीप ।
हटाएंबहुत सुन्दर.......जिंदा लोगों की बात भी कर ........
जवाब देंहटाएंआभार कौशल जी ।
हटाएंसुन्दर प्रस्तुति-
जवाब देंहटाएंआभार आदरणीय-
आभार रविकर जी ।
हटाएंआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 15 दिसम्बर 2020 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंउम्दा लेखन
जवाब देंहटाएंलाजवाब।
जवाब देंहटाएंवाह!गज़ब...
जवाब देंहटाएंप्रभावशाली लेखन ।
जवाब देंहटाएंThis article is very lovely and informative thanks for providing, and here are my click here to know more
जवाब देंहटाएंआप बिना घुमाए बता देते हैं कि खाली बकबक से अब ऊब हो चुकी है। सरकार, घर, काम और नए तरीकों की बात करने की मांग आज बहुत सटीक लगती है। मुझे यह भी अच्छा लगा कि आप चुप रहने और सोचने की बात भी रखते हैं, यह आज सबसे मुश्किल काम है।
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