उलूक टाइम्स: बेकार की नौटंकी छोड़ अब कभी प्यार की बात भी कर

शुक्रवार, 27 जून 2014

बेकार की नौटंकी छोड़ अब कभी प्यार की बात भी कर


बात करना 
इतना भी जरूरी नहीं 
कभी काम की बात भी कर 

बहुत कर चुका है 
बेकार की बातें 
कभी सरकार की बात भी कर 
 
जीना मरना 
सोना उठना खाना पीना 
सबको पता है 
इसकी उसकी छोड़ कर कभी 
अपनी और अपने
घरबार 
की बात भी कर 

कान पक गये 
बक बक सुनते सुनते तेरी
किसी एक दिन 
चुप चाप रहने रहाने की बात भी कर 

सब जगह होता है 
सब करते हैं 
पुराने तरीकों को छोड़ 
कुछ नये तरीके से 
करने कराने वालों की बात भी कर 

खाली बैठे 
बात ही बात में 
कितने दिन और निकालेगा 
कुछ अच्छी बात करने की सोच 
कुछ नई बातें करने की बात
ईजाद भी कर 

तंग आ चुका है 
श्मशान का अघोरी तक
लाशों की बात छोड़ 
कभी मुर्दों के जिंदा हो जाने की बात भी कर

‘उलूक’  बेकार की नौटंकी छोड़ अब
कभी प्यार की बात भी कर ।

चित्र साभार: 
https://www.disneyclips.com/

29 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (28-06-2014) को "ये कौन बोल रहा है ख़ुदा के लहजे में... " (चर्चा मंच 1658) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  2. लाशों की बात
    छोड़ कर कभी
    जिंदा लोगों
    की बात भी कर ।
    ...वाह...दिल को छूती बहुत ख़ूबसूरत रचना...

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  3. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति व रचना बेहद खूबसूरत ! , सर दोनों ब्लॉग को स्थान देने हेतु धन्यवाद :)

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  4. एक बार जरा आप इस लिंक का भी अवलोकन कर लें .... कुछ आवशयक कारणों से ऐसा मुझे करना पड़ रहा है ... आशा है आप अन्यथा नहीं लेंगे .... http://www.chalte-chalte.com/2014/06/blog-post_25.html

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    1. प्रिय केवल जी मैं इस सूत्र को पढ चुका था । बस टिप्पणी ही नहीं की थी । आपके इस सूत्र को मेरे मेल पर भेजने के कारण ही मैं दुबारा यहाँ आ रहा हूँ । ये सब बातें हमारे रोज के जीवन में बहुतायत में हो रही हैं । मेरी राय में इस तरह की बातें उठना ब्लाग जगत के लिये एक स्वस्थ परँपरा नहीं है। बाकी आप बहुत अच्छा काम कर रहे हैं । ब्लाग सेतू ऊचाईयों को छूऐ मेरी शुभकामनाऐं हैं । शास्त्री जी ब्लाग जगह के एक वरिष्ठ और सम्मानित ब्लागर हैं। किसी को भी ठेस लगे ये अच्छी बात नहीं है । अभी भी कुछ बिगड़ा नहीं है । आपस में बात कर के गलतफहमियों को दूर किया जा सकता है । आँखिरकार ये हमारा ब्लाग परिवार है और परिवार में मतभेद हो ही जाते हैं । बाकि आप समझदार हैं ।

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  5. लाशों की बात
    छोड़ कर कभी
    जिंदा लोगों
    की बात भी कर ।ज़िंदगी के फरमान की बात -कर।

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  6. नयी पुरानी हलचल का प्रयास है कि इस सुंदर रचना को अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    जिससे रचना का संदेश सभी तक पहुंचे... इसी लिये आप की ये खूबसूरत रचना दिनांक 30/06/2014 को नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है...हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...

    [चर्चाकार का नैतिक करतव्य है कि किसी की रचना लिंक करने से पूर्व वह उस रचना के रचनाकार को इस की सूचना अवश्य दे...]
    सादर...
    चर्चाकार कुलदीप ठाकुर
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  7. बहुत सुन्दर.......जिंदा लोगों की बात भी कर ........

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  8. सुन्दर प्रस्तुति-
    आभार आदरणीय-

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  9. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 15 दिसम्बर 2020 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  10. This article is very lovely and informative thanks for providing, and here are my click here to know more

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  11. आप बिना घुमाए बता देते हैं कि खाली बकबक से अब ऊब हो चुकी है। सरकार, घर, काम और नए तरीकों की बात करने की मांग आज बहुत सटीक लगती है। मुझे यह भी अच्छा लगा कि आप चुप रहने और सोचने की बात भी रखते हैं, यह आज सबसे मुश्किल काम है।

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