
बहते पानी की एक लहर लिख
और छोड़ दे
पानी में पानी
पानी में पानी
गंदा है या साफ है
कोई फर्क नहीं पड़ता है
बस पानी होना चाहिये
और उस पानी को
बहने की तमीज होनी चाहिये
मतलब
एक परिभाषा अनुरूप ही होना चाहिये
पानी
जैसे
पानी में रसायन रासायनिक पानी
पानी का मंत्री मंत्री पानी
पानी का प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री पानी
गंगा का पानी बिना कपड़े का नंगा पानी
पानी
टाई पहने हुऐ एक शरीफ पानी
शोध परियोजना का सबसे महंगा पानी
कुछ भी कह दो कुछ भी लिख दो
किसे पता चलना है कुछ
जब बह गया हो
पानी में पानी
पानी में पानी
बहुत आसान है
बहुत बेकार का है हर जगह दिखता है
हर जगह मिलता है वही
जो है पानी
जो है पानी
लूटता भी नहीं है जिसको हर लुटेरा
सोचता भी कहाँ है
पानी
पानी
बहुत अच्छा है
लिख लेना कभी थोड़ा सा
कुछ पानी
कुछ पानी
किस को पड़ी है
पानी की
पानी की
कहीं बहता रहे लिखा लिखाया
उसमें कहीं तेरा भी कुछ कहीं
पानी
पानी
कितना अच्छा है सोचने में
कि
तू भी पानी और मैं भी पानी
कहाँ होता है अलग
पानी से कभी कहीं का भी
पानी
पानी
लूट खसोट चूस और मुस्कुरा
और फिर कह दे सामने वाले से
कि मैं हूँ
पानी
पानी
‘उलूक’
तेरे पानी पानी हो जाने से भी
कुछ नहीं होना है
पानी को रहना है हमेशा ही
पानी ।
पानी ।
'सरगोशीयों के स्वर' में मुद्रित 12 पृ 37
आपकी लिखी रचना "मुखरित मौन में" शनिवार 06 अप्रैल 2019 को साझा की गई है......... https://mannkepaankhi.blogspot.com/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंजी नमस्ते,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (7 -04-2019) को " माता के नवरात्र " (चर्चा अंक-3298) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
आप भी सादर आमंत्रित है
अनीता सैनी
पानी रे पानी तेरा रंग कैसा !!!
जवाब देंहटाएंयहाँ तो रंग बिरंगा नजर आ रहा है....
बहुत खूब
जवाब देंहटाएंउलूक के पानी-पुराण में देशभक्ति तो बिलकुल गायब है. उसने अपने इस पानी-पुराण में हमारे देशभक्तों की आँखों का कोई ज़िक्र नहीं किया है जिनका कि पानी बिलकुल सूख चुका है. सबसे पहले ऐसी आँखों की सिंचाई व्यवस्था होनी चाहिए तब फिर यह कहानी आगे बढ़नी चाहिए.
जवाब देंहटाएंतुम भी पानी मैं भी पानी
जवाब देंहटाएंवाह बहुत सुंदर
बहुत खूब ... पानी तो पानी रहेगा ... अपने अंजाद से लिखेगा ... इंसान नहीं पर पढ़ पायेगा ... उसका पानी ख़त्म है ...
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज रविवार 21 मार्च 2021 शाम 5.00 बजे साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंपानी को संदर्भित कर बहुत कुछ कह गई आपकी अनुपम कृति,
जवाब देंहटाएंव्यंग्य के साथ गंभीर चिंतन । पानी का ख्याल तो रहना ही चाहिए ।
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