रास्ते अब दूर दूर तक कहीं भी
आसपास अपने नजर नहीं आते हैं
आसपास अपने नजर नहीं आते हैं
किसी ने अभी याद दिलाया मगर
हम तो कहीं भी आते जाते नहीं हैं
हम तो कहीं भी आते जाते नहीं हैं
छोड़ ही दिए तेरे बताए सारे रास्ते
रास्तों में ही कहीं नहीं बताते हैं
रास्तों में ही कहीं नहीं बताते हैं
किसने चलना है अब कहीं
तेरा नाम आते ही रास्ते बदल जाते हैं
तेरा नाम आते ही रास्ते बदल जाते हैं
परछाइयां ढक दी गई हैं मूर्तियों की
बुत के चित्र से आग जलाते हैं
बुत के चित्र से आग जलाते हैं
कैसे करे कोई तर्पण कोई अर्पण
यहाँ खंजर बेबात पर निकल जाते हैं
यहाँ खंजर बेबात पर निकल जाते हैं
तू मानुष ही रहा ताजिंदगी जहाँ
वहां आदमी के मंदिर बनाए जाते हैं
वहां आदमी के मंदिर बनाए जाते हैं
तेरे बारे में बातें करें भी करें कैसे
सत्य ही अहिंसा को अधर्म बताते हैं
सत्य ही अहिंसा को अधर्म बताते हैं
‘उलूक’ कैसे बचेगा कब तक बचेगा
रोशनी सारे अंधे अब अंधेरे में ही पढ़ाते हैं
रोशनी सारे अंधे अब अंधेरे में ही पढ़ाते हैं
बापू आ ही जाना याद कल भी चलो
जब तक लाठी चश्मे धोती हम नहीं बेच खाते हैं |
चित्र साभार: https://www.google.com/
जब तक लाठी चश्मे धोती हम नहीं बेच खाते हैं |
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