उलूक टाइम्स: सरगोशी
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शनिवार, 16 जनवरी 2010

आदमी और सौर मण्डल

आदमी
घूमता है तारा बन
अपने ही बनाये सौर मण्डल में

घूमते घूमते भूल जाता है
घूमना है उसे
अपने ही सूरज के चारों ओर

जिंदगी के हर हिस्से के सूरज
नज़र आते हैंं उसे अलग अलग

घूमते घूमते
भूल जाता है चक्कर लगाना
और
लगने लगता है उसे

वो नहीं
खुद सूरज घूम रहा है
उसके ही चारों ओर ।

चित्र साभार: https://www.123rf.com/

                                        'सरगोशीयों के स्वर' में मुद्रित 5  पृ 22