उलूक टाइम्स: लट्टू को घूमना होता है यहाँ होता है या वहाँ होता है

शनिवार, 7 जून 2014

लट्टू को घूमना होता है यहाँ होता है या वहाँ होता है

एक जमघट
के लट्टू का
निकल कर
कुछ दिन
किसी और जगह
दूसरे जमघट में
जा कर घूम लेना
देख लेना एक नई
भीड़ के तौर तरीके
अच्छा होता है
कुछ देर के
लिये ही सही
लट्टू को जैसे कुछ
फुरसत मिल जाती है
सोचने से नहीं
घूमने से
वैसे भी लट्टू कुछ
नहीं सोचता है
यहाँ होता है या
वहाँ होता है
लट्टू बने होते हैं
बस और बस
घूमने के लिये
रुके हुऐ लट्टू
अच्छे नहीं लगते
लट्टू को घूमते देखना
लट्टुओं को बहुत
पसंद आता है
लट्टू घूमता रहे
सामने सामने
पता रहता है
किधर से घूमता हुआ
किधर चला जाता है
परेशानी तब शुरु होती है
जब एक भीड़ के लिये
नाचने वाला लट्टू
कुछ देर के लिये
आँखों से ओझल
हो जाता है
बैचेनी शुरु होती है
बढ़ती है और
रहा नहीं जाता है
लट्टुओं को बहुत
राहत मिलती है
लट्टू जब लौट
कर आता है
अपने पुराने
लट्टुओं के बीच और
घूमना शुरु हो जाता है
जैसे हमेशा घूमता है
लट्टु लट्टुओं के लिये
रोज के अपने
जाने पहचाने
लट्टुओं के बीच ।

6 टिप्‍पणियां:

  1. लट्टुओं के बीच और
    घूमना शुरु हो जाता है
    जैसे हमेशा घूमता है
    लट्टु लट्टुओं के लिये
    रोज के अपने
    जाने पहचाने
    लट्टुओं के बीच ।
    ……
    अपनी परिधि से बाहर घूमना सीखा ही नहीं उसने स्वार्थी इंसानों तरह ....मुल्ला की दौड़ मस्जिद तक
    बहुत बढ़िया

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (09-06-2014) को "यह किसका प्रेम है बोलो" (चर्चा मंच-1638) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  3. राहत मिलती है
    लट्टू जब लौट
    कर आता है
    अपने पुराने
    लट्टुओं के बीच और
    घूमना शुरु हो जाता है
    अपनी सीमाओं में रहना हर किसी को खुशनुमां बनाता है,सुन्दर अभिव्यक्ति

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