उलूक टाइम्स: चल देखते हैं किसकी सीटी कौन अब कितना बजा ले जायेगा

चिट्ठा अनुसरणकर्ता

शनिवार, 22 फ़रवरी 2014

चल देखते हैं किसकी सीटी कौन अब कितना बजा ले जायेगा

व्हिसल ब्लोअर
विधेयक भी
हो गया है
राज्यसभा में
आज पास
सीटी बजाने
की इच्छा
रखने वालों की
चलो पूरी
हुई एक आस
बहुत लम्बे
समय से गले में
अटकी हुई थी
उनकी भी
सुना है साँस
अब हर विभाग
में किसी खास
को सीटी बजाने
का काम देना
बहुत आसान
हो जायेगा
पढ़ा लिखा कर
उससे किसी के
खिलाफ सीटी
बजवाने का
आनंद भी
चौगुना हो पायेगा
सीटियाँ बजेंगी
चारों तरफ से
बहुत जोर शोर से
एक आम आदमी
का ध्यान ही इन
आवाजों से बस
उलझ जायेगा
काम होते रहेंगे
उसी तरह से
मिलबाँट कर
भाईचारे के साथ
आजाद भारत में
शुरु किये धँधों
का बाजार और भी
चमकदार हो जायेगा
पहचान गुप्त रखी
जायेगी सीटी
बजाने वाले की
पास हुऐ बिल में
बताया भी जा रहा है
सीटी बजाने वाला
बहुत सारे कमीशन
पाने का हकदार
भी हो पायेगा
सीटी बजाने वाले
मरा करते थे बहुत
पहले से सुना है
अबकी बार सीटियाँ
सुनने वाला ही
मार दिया जायेगा
सीटियाँ बहुत
आसानी से मिलने
लगेंगी बाजार में
किसी मल्टीनेशनल
के साथ सीटियाँ
बनाने का कारोबार
जल्दी सरकार द्वारा
साझे में शुरु भी
करवा दिया जायेगा
सीटी बजाने
वाले ही मिलेंगे
ज्यादातर लोग
आज के बाद
सीटी नहीं रखने
वाले को अंदर
करवा दिया जायेगा ।

8 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ बे -रोज़गारों को मिल जाएगा सीटी बजाने का काम ,सीटी बजाओ रोज़गार योजना का श्री गणेश करेंगे राजनीति के प्रखर धंधेबाज़ श्रीयोजना लालजी।

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन ब्लॉग-बुलेटिन: एक रेट्रोस्पेक्टिव मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. सिटी किस प्रकार बजाई जाए इसके भी संस्थान खुलेंगे क्या ,..........बहुत सुन्दर........

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  4. बिना सीटी ध्यान ही नहीं जाता
    सीटियों की आदत इतनी गहरी पैठ गई है

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (24-02-2014) को "खूबसूरत सफ़र" (चर्चा मंच-1533) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  6. हर विषय पर तत्काल कविता लिखना कोई आपसे सीखे।..अच्छा लगा व्यंग्य।

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