उलूक टाइम्स: कोई गुलाम नहीं रह गया था तो हल्ला किस आजादी के लिये हो रहा था

रविवार, 26 जनवरी 2014

कोई गुलाम नहीं रह गया था तो हल्ला किस आजादी के लिये हो रहा था

गुलामी थी सुना था
लिखा है किताबों में

बहुत बार पढ़ा भी था
आजादी मिली थी

देश आजाद हो गया था
कोई भी किसी का भी
गुलाम नहीं रह गया था

ये भी बहुत बार
बता दिया गया था

समझ में कुछ
आया या नहीं
बस ये ही पता
नहीं चला था

पर रट गया था
पंद्रह अगस्त
दो अक्टूबर
और
छब्बीस जनवरी
की तारीखों को
हर साल के नये
कलैण्डर में हमेशा
के लिये लाल कर
दिया गया था

बचपन में
दादा दादी ने
लड़कपन में
माँ पिताजी ने
स्कूल में
मास्टर जी ने
समझा और
पढ़ा दिया था

कभी
कपड़े में
बंधा हुआ
एक स्कूल या
दफ्तर के डंडे
के ऊपर
खुलते खुलते
फूल झड़ाता
हुआ देखा था

समय के साथ
शहर शहर
गली गली
हाथों हाथ में
होने का फैशन
बन चला था

झंडा ऊंचा
रहे हमारा
गीत की
लहरों पर
झूम झूम कर
बचपन
पता नहीं
कब से कब तक
कूदते फाँदते
पतंग उड़ाते
बीता था

जोश इतना था
किस चीज का था
आज तक भी
पता ही नहीं
किया गया था

पहले समझ थी
या अब जाकर
समझना
शुरु हो गया था

ना दादा दादी
ना माँ पिताजी
ना उस जमाने के
मास्टर मास्टरनी
में से ही कोई एक
जिंदा बचा था

अपने साथ था
अपना दिमाग
शायद
समय के साथ
उस में ही कुछ
गोबर गोबर सा
हो गया था

आजादी
पाने वाला
हर एक गुलाम
समय के साथ
कहीं खो गया था

जिसने
नहीं देखी सुनी थी
गुलामी कहीं भी
वो तो पैदा होने से
ही आजाद हो गया था

बस
झंडा लहराना
उसके लिये साल के
एक दिन जरूरी
या
शायद मजबूरी
एक हो गया था

कुछ भी कर ले
कोई कहीं भी कैसे भी
कहना सुनना कुछ
किसी से भी
नहीं रह गया था

देश भी आजाद
देशवासी भी आजाद
आजाद होने का
ऐसे में क्या
मतलब रह गया था

किसी
को तो
पता होता
ही होगा

जब एक
'उलूक' तक
अपने कोटर में

तिरंगा लपेटे
“जय हिंद”
बड़बड़ाते हुऐ

गणतंत्र
दिवस के
स्वागत में
सोता सोता
सा रह गया था ।

3 टिप्‍पणियां:

  1. देश भी आजाद
    देशवासी भी आजाद
    आजाद होने का
    ऐसे में क्या
    मतलब रह गया था
    किसी को तो पता
    होता ही होगा जब

    ...........सच्चाई बयान करती रचना
    गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    संजय भास्कर
    http://sanjaybhaskar.blogspot.in

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज सोमवार (27-01-2014) को "गणतन्त्र दिवस विशेष" (चर्चा मंच-1504) पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    ६५वें गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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