उलूक टाइम्स: चिट्ठाकार हैं कुछ स्वाभिमानी हैं कुछ थोड़ा सा बस पानी पानी हैं

शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

चिट्ठाकार हैं कुछ स्वाभिमानी हैं कुछ थोड़ा सा बस पानी पानी हैं

 
थोड़ी सी हैं कुछ बातें हैं
खुद की हैं जो
खुद को बस थोड़ी सी समझानी हैं

किसी और से क्या कहना है कुछ
जब समझ में उसको
उसकी अपनी ही बातें नहीं आनी हैं

दिखता जो कुछ है
उसपर कुछ लिखना है
कहानी तो बस कुछ और ही
दिखे से इतर दो एक बनानी हैं

गांधी रखकर खोज  में अपनी
बंदर तीन उठा गोद में अपनी
नाख  कान आंख अपनी ही
खुद की ही तो बंद करवानी हैं

सच ही सोचेंगे सच ही खोदेंगे
सच की ही लड़ाई 
लड़ने को  ही
बस कुछ लिखने में ही ठानी है

अपने अपने लिखे लिखाए में
अपनी बातें इसकी बातें उसकी बातें
बातें तो बस आनी जानी हैं

कुछ पढ़ते हैं इसका ही लिखा
कुछ को लिखा उसका बस पढ़ना है
कुछ को बस लिखना ही है
पढ़ना ही बस बेमानी है

कुछ लिखते पढ़ते हैं
कुछ पढ़ते हैं फिर लिखते हैं
सब की अपनी आदत हैं
समझ में कुछ कुछ ही तो आनी हैं

चिट्ठाकारी से जन्मे हैं
कुछ चिट्ठे हैं
चिट्ठाकार हैं कुछ
स्वाभिमानी हैं
कुछ थोड़ा सा बस
पानी पानी हैं
|

                                                         
                                            चित्र साभार: https://www.dreamstime.com/

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8 टिप्‍पणियां:

  1. स्वाभिमानी हैं कुछ थोड़ा सा बस पानी पानी हैं |
    बेहतरीन
    वंदन

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  2. कुछ पढ़ते हैं इसका ही लिखा
    कुछ को लिखा उसका बस पढ़ना है
    कुछ को बस लिखना ही है पढ़ना ही बस बेमानी है
    वाह!!!
    क्या बात...
    बहुत सटीक।

    जवाब देंहटाएं
  3. प्रभावशाली लेखन,
    चिट्ठाकारों को हर हाल में अपनी कलम चलानी है,
    फ़ेसबुक, इंस्टा के इस युग में भी इसकी झंडी उठानी है

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  4. कुछ थोड़ा सा बस, पानी पानी हैं |

    जी
    साधुवाद

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