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शुक्रवार, 27 सितंबर 2013

जो भूत से डरता है पक्का श्राद्ध करता है

सोलह दिन
के पित्र पक्ष
के शुरु होते ही
पंडित जी बहुत ही
व्यस्त हो जाते हैं
श्राद्ध सामग्री
के लिये एक
लम्बी सूची भी
प्रिंट कराते हैं
दूध दही घीं शहद
काजू किशमिश
बादाम फल
मिठाई कपड़े लत्ते
अच्छी क्वालिटी
और
अच्छी दुकान से
लाने का आदेश
साथ में दे जाते हैं
खुद ही खा कर
पितर लोगों तक
खाना पहुंचाते हैं
इसलिये भोजन
छप्पन प्रकार का
होना ही चाहिये
समझा जाते हैं
सुबह सात बजे का
समय देकर दिन में
दो बजे से पहले कभी
नहीं आ पाते हैं
देरी का कारण
पूछने पर
बताने में भी नहीं
हिचकिचाते हैं
लोग बाग जीते जी
अपने मां बाप के लिये
कुछ नहीं कर पाते हैं
इसलिये मरने के बाद
उनकी इच्छाओं को पूरा
जरूर करना चाहते हैं
अपनी इच्छाओं को
इसके लिये
मारना भी पड़े
तब भी नहीं
हिचकिचाते हैं
मृतात्मा के जीवन
काल के शौक को
पंडित से पूरा कराते हैं
जजमान आप इतना भी
नहीं समझ पाते हैं
मरने के बाद मरने वाले
क्योंकि भूत बन जाते हैं
उसके डर से अपने को
निकालने के लिये लोग
कुछ भी कर जाते हैं
कुछ दिन हमारी भी
चल निकलती है गाड़ी
ऐसे लोग वैसे तो कभी
हाथ नहीं आते हैं
कुछ जजमान पीने के
शौक रखने वाले
पितर के नाम से
पंडित जी को अंग्रेजी
ला कर दे जाते हैं
उनके यहां पहले जाना
बहुत जरूरी
होता है इन दिनो
इसलिये आपके यहां
थोड़ा देर से आते हैं ।

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