चिट्ठा अनुसरणकर्ता

मंगलवार, 24 दिसंबर 2013

पानी से अच्छा होता अगर दारू पर कुछ लिखवाता

हर कोई तो पानी
पर लिख रहा है
अभी अभी का
लिखा हुआ पानी पर
अभी का अभी उसी
समय जब मिट रहा है
तुझे ही पड़ी है
ना जाने क्यों
कहता जा रहा है
पानी सिमट रहा है
जमीन के नीचे
बहुत नीचे को
चला जा रहा है
पानी की बूंदे
तक शरमा रही हैं
अभी दिख रही हैं
अभी विलुप्त
हो जा रही हैं
उनको पता है
किसी को ना
मतलब है ना
ही शरम आनी है
सुबह सुबह की
ओस की फोटो
तू भी कहीं लगा
होगा खींचने में
मुझे नहीं लगता
किसी और को
पानी की कहीं भी
याद कोई आनी है
इधर आदमी लगा है
ईजाद करने में
कुछ ऐसी पाईप लाइने
जो घर घर में जा कर
पैसा ही पैसा बहाने
को बस रह जानी हैं
तू भी देख ना कहीं
पैसे की ही धार को
हर जगह आजकल
वही बात काम में
बस किसी के आनी है
पानी को भी कहाँ
पड़ी है पानी की
अब कोई जरूरत
आँखे भी आँखो में
पानी लाने से
आँखो को ही परहेज
करने को जब कहके
यहाँ अब जानी हैं
नल में आता तो है
कभी कभी पानी
घर पर नहीं आता है
तो कौन सा गजब
ही हो जाना है
बस लाईनमैन की
जेब को गरम
ही तो करवाना है
तुरंत पानी ने
दौड़ कर आ जाना है
मत लिया कर इतनी
गम्भीरता से किसी
भी चीज को
आज की दुनियाँ में
हर बात नई सी
जब हो जा रही है
हवा पानी आग
जमीन पेड़ पौंधे
जैसी बातें सोचने
वाले लोगों के कारण
ही आज की पीढ़ी
अपनी अलग पहचान
नहीं बना पा रही है
पानी मिल रहा है पी
कुछ मिलाना है मिला
खुश रह
बेकार की बातें
मत सोच
कुछ कमा धमा
होगा कभी
युद्ध भी
अगर पानी को
लेकर कहीं
वही मरेगा
सबसे पहले
जो पैसे का नल
नहीं लगा पायेगा
पैसा होगा तो वैसे भी
प्यास नहीं लगेगी
पानी नहीं भी
होगा कहीं
तब भी कुछ अजब
गजब नहीं हो जायेगा
ज्यादा से ज्यादा
शरम से जमीन के
थोड़ा और नीचे
की ओर चला जायेगा
और फिर एक बेशरम
चीर हरण करेगा
किसी को भी
कुछ नहीं होगा बस
पानी ही खुद में
पानी पानी हो जायेगा ।

9 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (25-12-13) को "सेंटा क्लॉज है लगता प्यारा" (चर्चा मंच : अंक-1472) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. आपकी इस प्रस्तुति को आज की बुलेटिन मोहम्मद रफ़ी साहब और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  3. पानी रे पानी तेरा रंग कैसा ....

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  4. इधर आदमी लगा है
    ईजाद करने में
    कुछ ऐसी पाईप लाइने
    जो घर घर में जा कर
    पैसा ही पैसा बहाने
    को बस रह जानी हैं
    तू भी देख ना कहीं
    पैसे की ही धार को
    हर जगह आजकल
    वही बात काम में
    बस किसी के आनी है

    बड़े फलक की सशक्त रचना बड़ा कलेवर बे -आब छिपाए

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  5. मित्र! आज 'क्रिसमस-दिवस' पर शुभ कामनाएं,! सब को सेंटा क्लाज सी उदारता दे और ईसा मसीह सी 'प्रेम-शक्ति'!
    वाह! क्या व्यंग्य है !!

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  6. बड़ा दिन ईसा का अवतरण दिवस मुबारक।

    क्रिसमस दिवस (Xmas Day )पर सर्व समावेशी उद्गारों की आवश्यकता है।

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