उलूक टाइम्स

शुक्रवार, 3 अगस्त 2012

बाहर कर लिया /अब अंदर जायेंगे

खबर आई है आज
सब टेंट हटाये जायेंगे
टेंट वाले जो जो हैं
अन्दर पहुँचाये जायेंगे
अन्दर जा कर होगा क्या
ये अन्दर से ही बतायेंगे
अन्दर वाले उसके बाद
क्या बाहर फेंके जायेंगे
या बाहर से अन्दर घुसने
से वो रोके जायेंगे
सारी की सारी बातें
हम तुमको आज
अभी नहीं बतायेंगे
अन्दर भेजे तो जायेंगे
पर धक्के कौन लगायेंगे
सफेद टोपियों को अब
रंगने का कारोबार चलायेंगे
एक भाई से गेरूआ रंग
उसमें करवायेंगे
दूसरे भाई से हरा रंग
भरने का काम करायेंगे
चाचा जी से सफेद टोपी
पर तिरंगा बनवायेंगे
इनको अंदर जाने देंगे
हम उद्योग लगायेंगे
अपने अपने घर को
सब बाहर  वाले जायेंगे
घर में जाकर घरवालों
का ही तो हाथ बटायेंगे
कुछ फिर से अपनी
साईकिल चलायेंगे
कुछ जाकर हाथी की
पीठ पर चढ़ जायेंगे
फूल वाले फूल का
गुलदस्ता बनायेंगे
हाथ हिलाने वाले लोग
अब भी हाथ हिलायेंगे
खबर आई है आज
सब टेंट हटाये जायेंगे
टेंट वाले जो जो हैं
अन्दर पहुँचाये जायेंगे ।

गुरुवार, 2 अगस्त 2012

रक्षाबंधन मनायें चलो जुगाड़ पेटेंट करायें


रक्षाबंधन की शुभकामनाएं
आज काम में ले ही आयें
भाईयों और बहनोंं का उत्साह
इस बहाने से चलो कुछ बढ़ायें

जोड़तोड़ के 
लिये मशहूर जनतंत्र में
आओ कुछ जुगाड़ को समझें आत्मसात करें 
और जुगाड़ियों को नजदीक से जान कर
अपना ज्ञान बढ़ायें

जुगाड़ के इस 
गजब के हुनर को 
कोशिश कर 
देश के काम में लाने का
कुछ जुगाड़ आज लगायें

जुगाड़ी देश वासियों को
चलो ये संदेश आज दे कर आयें
जुगाड़ बनाने और इस के लिये 
मनमाफिक जुगाड़ का गणित
काम में लाने का पेटेंट आज करायें

कैसे किसी 
असंभव काम को
जुगाड़ लगा कर संभव हम बना ले जायें
काम अपना अपना निकलवाने के लिये
किस 
मौके पर कौन सा जुगाड़ हम लगायें

किस काम को कौन सा जुगाड़ कर ले जायेगा
और इसके लिये किन किन जुगाड़ियों को
इस बार एक कर काम लिया जायेगा
परम्यूटेशन काम्बीनेशन के इस जुगाड़ी जादू को
चलो आज एक बार फिर कहीं आजमायें

वाकई आज 
जरूरत है इस कठिन दौर में एक
जुगाड़ियों के महा सम्मेलन की
चलो कुछ जुगाड़ियों को उकसायें

जुगाड़ कुछ कर 
हम इसको कर ही ले जायें
सारी दुनियाँ को क्यों नहीं आज
जुगाड़ काँसेप्ट से हम रूबरू करायें

कैसे नहीं होगा 
अन्नाबाबा का आंदोलन सफल
आईये हम अपने सारे जुगाड़ों को
सारी जुगाड़ी ताकतों के साथ आज झोंक ले जायें

अन्नाबाबा के 
लिये
जुगाड़ के 
हथियार को आजमायें
पुरानी भीड़ एक बार फिर से जुटा कर दिखायें
जुगाड़ की ताकत चलो आज एक बार
देश के लिये आजमायें ।
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चित्र साभार:
https://in.pinterest.com/sayed_askari/indian-jugad/

बुधवार, 1 अगस्त 2012

जोकर बचा / सरकस बच गया

जोकर ही
चले जायेंगे
तो सरकस
बंद हो जायेँगे

ये बात
किसी किसी
के समझ में
बहुत आसानी
से आ जाती है

जो जोकरों
को बर्बाद
होने से बचा
ले जाती है

सरकार भी
बहुत संजीदगी
से अपनी
जनता के बारे
में सोचती है

किसी के
लिये कुछ
करे ना करें
जोकरों के
लिये जरूर
एक कुआँ
कहीं ना कहीं
खोदती है

ये बात
सब लोग
नहीं जान
पाते हैं

कुछ लोग
जोकरों के
बीच
रहते रहते
जोकरिंग में
माहिर हो
जाते हैं

जोकरों
की खातिर
खुद भी
जोकर
हो जाते हैं

जोकरों की
समस्या लेकर
सरकार के
पास बार बार
कई बार जाते हैं

सरकार में
भी बहुत
से जोकर
होते हैं
जिनको ये
जोकर ही बस
पहचान पाते हैं

जोकरों
की खातिर
जोकर होकर
सरकार के
जोकरों से
जोकरों
के लिये
जोकरिंग
करने के
लाईसेंस का
नवीनीकरण
करा ही लाते हैं

सरकस को
बरबाद होने
से बचा
ले जाते हैं

ये बात
जोकरों
की सभा में
सभी जोकरों
को बुला
कर बताते हैं

जोकर लोग
जोर जोर
से तालियाँ
बजाते हैं
सरकार की
जयजयकार
के नारे साथ
में लगाते हैं

सरकारी
जोकर बस
दांत ही
दिखाते है ।

मंगलवार, 31 जुलाई 2012

जो है क्या वो ही है

किसी का
लिखा हुआ
कुछ कहीं
जब कोई
पढ़ता
समझता है

लेखक
का चेहरा
उसका
व्यक्तित्व
भी गढ़ने
की एक
नाकाम
कोशिश
भी साथ
में करता है

सफेदी
दिख रही
हो सामने
से अगर

कागज पर
एक सफेद
सा चेहरा
नजर आता है

काला
सा लिखा
हुआ हो कुछ

चेहरे
पर कालिख
सी पोत
जाता है

रंग
लाल
पीले हों
कभी कभी
कहीं
गडमगड्ड
हो जाते हैं

लिखा हुआ
होता तो है
पर पहचान छुपा
सी कुछ जाते हैं

लिखने पर
आ ही
जाये कोई
तो बहुत
कुछ लिखा
जाता है

पर अंदर
की बात
कहाँ कोई
यहाँ आ
कर बता
जाता है

खुद के
सीने में
जल रही
होती है 
आग
बहुत सारी

जलते
जलते भी
एक ठंडा
सा सागर
सामने ला
कर दिखाता है

किसी
किसी को
कुछ ऎसा
लिखने में
भी मजा
आता है

आँखों
में जलन
और
धुआँ धुआँ
सा हो जाता है

वैसे भी
जब साफ
होता है पानी

तभी तो
चेहरा भी
उसमें साफ
नजर आता है

यहां तो
एक चित्र
ऎसा भी
देखने में
आता है
जो अपनी
फोटो में
भी नजरें
चुराता है

ले दे कर
एक चित्र
एक लेख
एक आदमी

जरूरी
नहीं है जो
दिखता है
वही हो
भी पाता है ।

सोमवार, 30 जुलाई 2012

बेकार तो बेकार होता है

किसी के पास
होती है कार
कोई बिना
कार के होता है
किसी का
आकार होता है
कोई कोई
निराकार होता है
और एक
ऎसा होता है जो
होता तो है
पर बेकार होता है
ये बेकार
होना भी कई
कई प्रकार
का होता है
नौकरी नहीं
मिल पाती
तो बेकार
हो जाता है
छोकरी पाकर
भी कोई कोई
बेकार हो जाता है
कुछ नहीं
आता है और
बेकार कहलाता है
कभी कभी
बहुत कुछ
जानते हुऎ
भी कोई
बेकार हो जाता है
ज्यादातर
एक बेकार
बहुत दिनों
तक बेकार
नहीं रह पाता है
मौका मिलते ही
सरकार
बना ले जाता है
एक बेकार आपको
साकार
पर लिखता
हुआ मिल जाता है
दूसरा
निराकार को
आकार अपनी
कलम से ही
दे जाता है
बहुत सारा
बेकार बेकार
के द्वारा
बेकार पर ही
लिखा हुआ
मिल जाता है
खुद ही देख
लीजिये जा कर 
आप ही अपने आप
ज्यादा कारों
को एक बेकार
बेकार पर ही
खड़ा पाता है
पर जो है
सो है
वो तो है
एक बात सौ
आने पक्की है
कि बेकार
है क्या और
क्या नहीं है
बेकार
एक बेकार
से अच्छा
कोई नहीं
किसी को
कभी बता
पाता है ।

रविवार, 29 जुलाई 2012

एक चाँद बिना दाग

एक चाँद
बिना दाग का

कब से मेरी
सोच में यूँ ही
पता नहीं क्यों
चला आता है

मुझ से
किसी से
इसके बारे में
कुछ भी नहीं
कहा जाता है

चाँद का बिना
किसी दाग के
होना
क्या एक
अजूबा सा नहीं
हो जाता है

वैसे भी
अगर 
चाँद की बातें
हो रही हों
तो दाग की
बात करना
किसको
पसंद 
आता है

हर कोई
देखने
आता है
तो 
बस
चाँद को
देखने
आता है

आज तक
किसी 
ने भी
कहा क्या

वो एक दाग को
देखने के लिये
किसी चाँद को
देखने आता है

आईने के
सामने 
खड़ा
होकर देखने
की कोशिश
कर 
भी लो
तब भी

हर किसी को
कोई एक दाग
कहीं ना कहीं
नजर आता है

अब ये
किस्मत की
बात ही होती है

कोई चाँद की
आड़ लेकर
दाग 
छुपा
ले जाता  है

किस्मत
का मारा
हो कोई
बेचारा चाँद

अपने दाग
को 
छुपाने
में ही 
मारा
जाता है

उस समय
मेरी 
समझ
में कुछ 
नहीं
आता है

जब
एक चाँद
बिना दाग का
मेरी सोच में
यूँ ही चला
आता है ।

शनिवार, 28 जुलाई 2012

हिन्दी कुत्ता अंग्रेजी में भौंका

बहुत सारे कुत्ते
अगर भौंकना
शुरु हो जायें
एक साथ

क्या कोई
बता सकता है
कि हिंदी में
भौंक रहा है
या अंग्रेजी में

लेकिन
कभी कभी
ऎसा भी
देखने में
आ जाता है
हिंदी भाषी
एक कुत्ता
अचानक
अंग्रेजी में
भौंकना शुरु
हो जाता है

हाँ
ऎसा भी बस
तभी देखने
में आता है
जब वो
हवाई जहाज
से इधर
उधर जाता है

अब आप कहेंगे
कुत्ता था
ये समझ
में आता है
भौंक रहा था
वो भी समझ में
आता है

हिन्दी में
भौंका था
या
अंग्रेजी में था
ये आप को कैसे
पता चल पाता है

अब जनाब
क्या
सारी की
सारी बात
हम ही
आपको
बताते
चले जायेंगे

कुछ बातें
आप अपने
आप भी
पता नहीं
लगायेंगे

पता लगाईये
और
हमें भी बताइये

कुछ पैसा
खर्च वर्च
कर जाईये

हवाई
जहाज से
यात्रा कर
के आईये

आप जरूर
किसी ना
किसी ऎसे
कुत्ते से
टकरायेंगे

जमीन पर
उसे हिन्दी
में भौंकता
हुआ पायेंगे

और
हवाई जहाज
के उड़ते ही
आसमान मे

आप
आश्चर्य चकित
हो जायेंगे

जब उसी
कुत्ते को

अंग्रेजी में
भाषण
फोड़ता
हुआ पायेंगे । 

शुक्रवार, 27 जुलाई 2012

गद्दार डी एन ए

डी एन ए से देखिये
कैसे डी एन ए
मिल गया
बाप को एक बेटा
बेटे को एक
बाप मिल गया
बहुत खुशी
की बात है
बहुत पुरानी
बात का बहुत
दिनों बाद
पता चल गया
क्या फर्क पड़ा
चाहे इसमें एक
पूरा युग लग गया
पर बहुत ही
खतरनाक चीज है
ये डी एन ए
अपना ही होता है
और गद्दारी भी
अपनो से कर लेता है
ढोल बजा देता है
और पोल खोल देता है
देखिये तो कहाँ
से होकर कहाँ
निकल जाता है
कभी किसी को
कुछ भी कहाँ बता
के जाता है
दिखता सूक्ष्मदर्शी
से भी नहीं है
पर रास्ते रास्ते में
अपने निशान छोड़ता
चला जाता है
पता ही नहीं चलता
और एक दिन
यही डी एन ए
गांंधी हो जाता है
आज भी तो
यही हुआ है
डी एन ए ने
सब कुछ
कह दिया है
अब इसे देख देख
कर बहुत से
घबरा रहे हैं
याद कर रहे हैं
कि कहाँ कहाँ
वो डी एन ए छोड़
के आ रहे हैं
कान भी पकड़ते
जा रहे हैं
अगली बार से
बिल्कुल भी
डी एन ए को साथ
नहीं ले जाना है
कसम खा रहे हैं ।

गुरुवार, 26 जुलाई 2012

250 वीं पोस्ट

बात बात
पर 
कूड़ा 
फैलाने की
फिर उसको
कहीं पर

ला कर
सजाने की

आदत

बचपन से थी


बचपन में
समझ में

जितना
आता था


उससे ज्यादा
का कूड़ा
 
इक्कट्ठा
हो जाता था


आसपास
परिवार
अपना
होता था


वही
रोज का रोज

उसे उठा
ले जाता था


दूसरे दिन
कूड़ा फैलाने

के लिये
फिर वही

मैदान
दे जाता था


कूड़ा
 था
कहाँ कभी

बच पाता था
जमा ही नहीं
कभी हो
पाता था


जवानी आई
कूड़े का

स्वरूप
बदल गया


सपनों के
तारों में

जाकर
टंकने लगा


एक तारा
उसे
आसमान

में ले कर
जाता था


एक तारा
टूटते हुऎ

फिर से उसे
जमीन पर

ले कर
आता था


सब उसी
तरह से

फिर से
बिखरा बिखरा

कूड़ा
हो जाता था


कितना भी
सवाँरने की

कोशिश करो

कहीं ना कहीं

कुछ ना कुछ
कूड़ा 
हो ही
जाता था


कूड़ा लेकिन
फिर भी

जमा नहीं
हो पाता था


अब याद भी
नहीं आता

कहाँ कहाँ
मैं जाता था


कहाँ का
कूड़ा लाता था

कहाँ जा कर उसे
फेंक कर आता था

बचपन से
शुरु होकर

अब जब
पचपन की

तरफ भागने लगा

हर चीज
जमा करने

का मोह
जागने लगा


कूड़ा
जमा होना
शुरू हो गया


रोज का रोज

अपने घर का 
उसके
आसपास का

बाजार का
अपने शहर का

सारे समाज का
कूड़ा देख देख
कर आने लगा

अपने अंदर
के कूडे़ को

उसमें
थोड़ा थोड़ा

दूध में पानी
की तरह

मिलाने लगा

गुलदस्ते
बना बना के

यहाँ पर
सजाने लगा


होते होते
बहुत हो गया


एक दो
करते करते

आज कूड़ा
दो सौ पार कर

दो सौ पचासवाँ
भी हो गया ।

बुधवार, 25 जुलाई 2012

अब अलग हो जाओ चूहो

बहुत खुश
नजर
आ रहे थे

आज
लोग बाग
यहाँ वहाँ
और ना जाने
कहाँ कहाँ

चूहों को
अलग अलग
दिशाओं में
जाता हुआ
देखकर
ताली बजा रहे थे

पर ये भूल
जा रहे थे

सब कुछ
कुतरने
के बाद
का दृश्य

भूत में भी
हमेशा से
ऎसा ही हुआ
करता आया है

चूहे बिल
बनाते हैं
कहाँ कहॉं
कुतर रहे हैं
क्या क्या
कुतर रहे हैं
कैसे कुतर रहे हैं
कहाँ किसी को ये
सब कभी बताते है

जिसे
दिखता है
बस
कुतरा हुआ
दिखता है

चूहा
कोई भी
उसके
आसपास
कहीं एक भी
दूर दूर तक
नही किसी
को दिखता है

और ये भी
अगले आक्रमण
की एक सोची
समझी तैयारी है
ये बात किसी
के भी समझ में
कहीं भी तो
नहीं आ रही है

चुहिया
इस समय
सबको
समझा रही है
अलग  हो
जाने का
आदेश देती
जा रही है

जाओ
वीरो जाओ
अपने दांंत
और पंजे
फिर से
घिसने के लिये
तैयार हो जाओ

समय
आ गया है
देश को
फिर से
पाँच
साल के लिये
नये सिरे से
कुतर के
खाना है

जाओ अलग
अलग हो जाओ

सब को
सोने का मौका
दे कर सुलाना है

फिर से
लौट कर
यहीं आ जाना है

नयी ताकत
बटोर कर
फिर एक
हो जाना है

देखने वाले
गदगद
हुऎ जा रहे हैं
सोच रहे हैं
बेवकूफ चूहे
आपस में
लड़ते जा रहे हैं

सारी मलाई
उनके
खाने के लिये
ऎसे ही छोड़
के जा रहे हैं

उनको
कहाँ
मालूम है
चूहे पुराने
बिलों को
छोड़ कर
नये बिलों
को खोदने
के लिये
जा रहे हैं ।