उलूक टाइम्स: सबसे बड़ा सच तो झूठ होता है

चिट्ठा अनुसरणकर्ता

रविवार, 27 अक्तूबर 2013

सबसे बड़ा सच तो झूठ होता है

सच को
बस
छोड़कर
सब कुछ
चलता हुआ
दिखाई
देता है

सच सबके
पास होता है

जेब में कमीज
और पेंट की
हाथ में कापी
और किताब में

एक के सच
से दूसरे को
कोई मतलब
नहीं होता है

अपने अपने
सच होते हैं
सब का
आकार
अलग
होता है
जैसे
किसी के
पैर की
चप्पल या
जूता होता है

एक का सच
दूसरे के
काम का
नहीं होता है

कोई किसी
के सच के
बारे में
किसी से
कुछ नहीं
कहता है

हाँ झूठ
बहुत ही
मजेदार
होता है

सब बात
करते हैं
झूठ की
झूठ का
आकार
नहीं होता है

एक का झूठ
दूसरे के भी
बहुत काम
का होता है

पर किसी
को पता
नहीं होता है
झूठ कहाँ
होता है

सूचना का
अधिकार
झूठ को ही
ढूंढने का
ही हथियार
होता है

सबसे ज्यादा
चलता हुआ
वही पाया
जाता है

सच बेवकूफ
मैं सच हूं
सोच सोच कर
एक जगह ही
बैठा रह जाता है

जहाँ पहुचने
की कोई
सोच भी
नहीं सकता
झूठ जरूर
पहुंच जाता है

झूठ के पैर
नहीं होते है
बहकाने के
लिये ही
शायद कह
दिया जाता है ।

9 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति को आज की बुलेटिन शहीद जतिन नाथ दास और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज सोमवार (28-10-2013)
    संतान के लिए गुज़ारिश : चर्चामंच 1412 में "मयंक का कोना"
    पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. पिछले २ सालों की तरह इस साल भी ब्लॉग बुलेटिन पर रश्मि प्रभा जी प्रस्तुत कर रही है अवलोकन २०१३ !!
    कई भागो में छपने वाली इस ख़ास बुलेटिन के अंतर्गत आपको सन २०१३ की कुछ चुनिन्दा पोस्टो को दोबारा पढने का मौका मिलेगा !
    ब्लॉग बुलेटिन इस खास संस्करण के अंतर्गत आज की बुलेटिन प्रतिभाओं की कमी नहीं 2013 (1) मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  4. वाकई ! बिलकुल सही लिखा है आपने !

    सच बेवकूफ
    मैं सच हूं सोच सोच कर
    एक जगह ही बैठा रह जाता है
    जहाँ पहुचने की कोई
    सोच भी नहीं सकता
    झूठ जरूर पहुंच जाता है
    झूठ के पैर नहीं होते है

    अत्यंत प्रभावशाली एवँ सशक्त रचना !

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